नौ गांवों के किसानों ने किसान न्याय पंचायत बुलाई
10 मांगों को लेकर सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह । आईएमटी रोजकामेव में भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर 9 गांवों के किसानों ने सोमवार को नूंह अनाजमंडी में किसान न्याय पंचायत का आयोजन किया। इस पंचायत में भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के किसानों सहित कई किसान संगठनों ने भाग लिया। पंचायत के बाद किसानों ने जिला सचिवालय तक पैदल मार्च करते हुए अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन (सीटीएम) को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा।
पंचायत में किसानों ने अपनी करीब 10 मांगे रखते हुए कहा कि आईएमटी रोजकामेव के किसानों से धोखाधड़ी से कराया एग्रीमेंट निरस्त किया जाए। 2012 से बकाया 25 लाख मुआवजा ब्याज सहित दिया जाए। 9 गांवों के किसानों को रिहायसी प्लॉट मुफ्त में दिए जाए। 9 गांवो में कब्रिस्तान व शमशान घाट, ईदगाह, स्टेडियम तालाब व सार्वजनिक कार्यों के लिए उचित जगह छोड़ी जाए व गांव से गांव रास्तों को जोड़ा जाए।
आईएमटी रोजका मेव में लगने वाली औद्योगिक में 9 गांवों सहित मेवात के लोगों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। आईएमटी में लगने वाले बिजली घर 220 केवी सब स्टेशन व अन्य सब स्टेशन का लाभ 9 गांवों को दिया जाए। आईएमटी में पोलिटेक्निकल कुशलता विकास केंद्र की स्थापना की जाए। आईएमटी के अधिग्रहण क्षेत्र में एक नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की जाए। महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत गरीब परिवार को 100-100 गज के प्लॉट दिए जाए।
2010 में हुई थी किसानों की भूमि अधिग्रहण :
आईएमटी रोजकामेव के लिए 9 गांवों के किसानों की वर्ष 2010 में 1600 एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई थी। उस दौरान किसानों की जमीन को सरकार द्वारा 25 लाख रुपये का मुआवजा देकर प्रति एकड़ अधिग्रहण किया गया था,लेकिन इसके बाद सरकार ने फरीदाबाद के चंदावली, मच्छगर गांवों की जमीन को भी अधिग्रहण किया। वहां के किसानों ने कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी जमीन को सस्ते दामों में सरकार पर लेने का आरोप लगाकर मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने किसानों को प्रति एकड़ दो करोड़ की राशि देने के आदेश दिए थे।
इस दौरान जब 9 गांवों के किसानों को पता चला कि उक्त गांवों के किसानों को दो करोड़ प्रति एकड़ मिले हैं तो उन्होंने भी लंबी लड़ाई लड़कर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। जिस पर सरकार ने किसानों से बातचीत करते हुए उनकी जमीन को 46 लाख रुपये प्रति एकड़ देने की बात कही और उनसे एफिडेविट पर साइन करा लिए, ताकि किसान कोर्ट में ना जा सके और सभी किसानों को 21- 21 लाख रुपये देकर कहा कि आगे आपको 25-25 लाख रुपए ओर दे दिए जाएंगे, लेकिन आज तक भी किसानों कोरुपए नहीं दिए गए हैं।