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न्याय को भटक रहा पिता, नहीं मिला बेटे का हत्यारोपी

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गुरुग्राम। यस बैंक में मैनेजर रहे बेटे की हत्या के आरोपी को जेल की सलाखों तक पहुंचाने के लिए व बुढ़ापे की लाठी के छिनने पर न्याय मांग रहे एक पिता को नौ माह से ज्यादा बीत चुके हैं। पुलिस और सीबीआई अब तक इस बेबस पिता को न्याय नहीं दिला सकी है। बुजुर्ग ने जिस युवक पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया है, उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य भी तलाश नहीं किए गए हैं। बेबस पिता का बस यही कहना है कि उनका एक ही सहारा उनका बेटा था, पुलिस और सीबीआई उन्हें क्यों न्याय नहीं दिला पा रही है।
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सेक्टर-46 में रहने वाले बुजुर्ग राज सिंह अहलावत ने बताया कि पिछले वर्ष पांच अगस्त को उनका बेटा यस बैंक की एक शाखा का मैनेजर धीरज अहलावत घर से बाहर पार्क में घूमने निकला था। यहां सेक्टर-45 में रहने वाले एक युवक (जो धीरज का बिजनेस पार्टनर व दोस्त था) ने फोन कर धीरज को कहीं बाहर मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद धीरज देर रात तक घर नहीं लौटा तो पिता ने सेक्टर-50 थाने में अगले दिन गुमशुदगी का मामला दर्ज करा दिया। एक सप्ताह बाद दिल्ली के अंबेडकर अस्पताल के पास धीरज का शव मिला। धीरज की हत्या की गई थी। धीरज के पिता ने बेटे के दोस्त पर हत्या का शक जाहिर करते हुए मामला दर्ज कराना चाहा तो पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। पीड़ित पिता का आरोप है कि शहर के तत्कालीन डीसी अमित खत्री से बेटे के दोस्त के अच्छे संबंध थे, इसी के चलते पुलिस उस पर कार्रवाई करने से बचती रही।
सीबीआई को सौंपी गई जांच, फिर भी हाथ खाली
धीरज की हत्या के एक माह बाद पिता के मूल गांव के लोगों ने जब रोहतक मार्ग पर जाम लगाकर न्याय दिलाने की मांग की तो मामला रोहतक पुलिस को सौंप दिया गया। धीरज के पिता का आरोप है कि वहां भी आरोपी दोस्त ने पुलिस सें साठगांठ कर ली। गांव के लोगों ने जब रोहतक मार्ग पर दोबारा जाम लगाया तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के आदेश पर बेटे की हत्या का मामला पिछले वर्ष अक्तूबर में सीबीआई को सौंप दिया गया। हालांकि सीबीआई इस मामले मेें छह माह की जांच के बाद भी आज तक खाली हाथ है। मृतक बेटे के पिता को बेटे के जिस दोस्त पर शक है, उसके खिलाफ ठोस सबूत न होने का हवाला देकर उसकी गिरफ्तारी से बचा जा रहा है। पीड़ित पिता का कहना है कि उनके बेटे के हत्यारोपी पर पुलिस और सीबीआई आज तक शिकंजा नहीं कस चुकी है, आखिर उन्हें कब न्याय मिलेगा।
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