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दवाओं की कमी से बढ़ रही ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों की चिंता

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गुरुग्राम (पंकज मोहन मिश्रा)। ब्लैक फंगस इंफेक्शन (म्यूकरमाइकोसिस) के इलाज को लेकर मुख्यमंत्री ने भले ही प्रदेश में चार नए केंद्र खोलने की बात कही है लेकिन दवाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। इसके कारण निजी अस्पतालों में भी इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है तो वहीं इलाज में कारगर प्रमुख दवाओं की कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के पास इसके मरीजों का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है बावजूद इसके अलग-अलग सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में इसके करीब 100 मरीज आ चुके हैं, जोकि नामी अस्पतालों में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने मुताबिक एंफोटेरेसिन बी व लिपोसोमल एंफोटेरेसीन बी सरीखी कुछ दवाएं हैं, जो म्यूकरमाइकोसिस मरीजों के इलाज में कारगर हैं लेकिन इनकी उपलब्धता काफी सीमित है। इस तरीके से संक्रमण का दायरा बढ़ रहा है, उसको देखते हुए इनकी उपलब्धता की स्थिति भी कहीं रेमडेसिविर जैसी न हो जाए।
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ये दवाएं कारगर और इन्हीं की है कमी
कोलंबिया एशिया अस्पताल के ईएनटी विभाग के कंसलटेंट डॉ. शशांक वशिष्ठ ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस के इलाज में कारगर एंफोटेरिसिन बी तो उपलब्ध है लेकिन लिपोसोमल एंफोटेरेसिन बी की उपलब्धता कम है। लिपोसोमल एंफोटेरेसिन बी का ब्रेन पेनेट्रेशन बेहतर है और यह किडनी के लिए कम विषाक्त है। इसावुकोनाजोल और पॉसोकैनाजोल जैसी अन्य दवाएं भी इंजेक्शन और ओरल उपायों में उपलब्ध हैं, लेकिन यह दवाएं बहुत ही मुश्किल से मिल रही हैं। सेक्टर-15 इलाके के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर यहां तक बताया कि इन सभी दवाओं की कालाबाजारी शुरू हो चुकी है। आगामी दिनों में इन दवाओं की कालाबाजारी और बढ़ेगी।
एसजीटी में भी एक मरीज भर्ती
वहीं, सरकार की तरफ से म्यूकरमाइकोसिस केयर सेंटर के तौर पर घोषित एसजीटी मेडिकल कॉलेज में भी एक मरीज भर्ती हो चुका है। अधिकांश मरीजों का निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. जयप्रकाश के मुताबिक निजी अस्पतालों को ब्लैक फंगस इंफेक्शन से पीड़ित मरीजों की जानकारी देने को कहा गया है और सभी अस्पताल सीधे राज्य सरकार को ही मरीजों की जानकारी देंगे।
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इन अस्पतालों में भर्ती हैं मरीज
जिले में अब तक जिन अस्पतालों में म्यूकरमाइकोसिस से पीड़ित मरीज आए हैं, उनमें एसजीटी मेडिकल कालेज, पारस, कोलंबिया एशिया, फोर्टिस व मेदांता अस्पताल शामिल हैं। इन्हीं अस्पतालों को मिलाकर ही करीब 40 मरीज भर्ती हो चुके हैं जबकि अन्य अस्पतालों में भी म्यूकरमाइकोसिस मरीजों का इलाज शुरू किया जा चुका है। वहीं, पिछले रविवार को मुख्यमंत्री ने अस्थायी अस्पताल के उद्घाटन के दौरान बताया था कि प्रदेश में अब तक करीब 70 मरीज आ चुके हैं। फोर्टिस व मैक्स अस्पताल में एक-एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
दो सप्ताह में ठीक होते हैं मरीज
पारस अस्पताल के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. अमिताभ मलिक ने बताया कि ब्लैक फंगस इंफेक्शन से पीड़ित मरीजों को ठीक होने में 2 सप्ताह का समय लगता है जबकि अस्पताल में रोजाना 3 नए मरीज आ रहे हैं। डॉ. अमिताभ मलिक के मुताबिक यह संक्रमण ज्यादातर डायबिटीज मरीजों और जिनकी इम्युनिटी कमजोर रहती है, उनमें हो रहा है। सभी मृत और संक्रमित टिश्यू को हटाने के लिए एंटी-फंगल थेरेपी के जरिये मरीजों का इलाज किया जाता है।
ये हैं लक्षण व बचाव के तरीके
डॉ. शशांक वशिष्ठ ने बताया कि यह इफेक्शन आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों में देखा जाता है। यह कान और नाक के मध्य हिस्से को प्रभावित करता है। नाक में जमाव, नाक से काले रंग का स्राव, गाल की हड्डी पर दर्द, एक तरफा चेहरे का दर्द, सुन्न होना या सूजन, सीने में दर्द, इसके लक्षणों में शामिल हैं। इससे बचने के लिए धूल भरी जगहों पर जाने के दौरान अनिवार्य रूप से मास्क का प्रयोग, बागवानी करते समय जूते, लंबी पतलून, लंबी बाजू की शर्ट और दस्ताने पहनना अनिवार्य है।
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