पर्यावरणविदों के एक समूह ने कहा- अरावली सफारी के बहाने कटेगी अरावली की हरियाली
अरावली में वन्य जीवों के टिकने लायक वातावरण नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा में बनने वाली सबसे बड़ी जंगल सफारी पर पर्यावरणविदों ने सवाल उठाए हैं। इस योजना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी गई है। इससे पहले उनकी ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया था। विरोध कर रहे समूह का तर्क है कि अत्यधिक सर्दी और गर्मी के कारण अरावली का वातावरण वन्यजीवों के लिए अनुकूल नहीं है। उनका मानना है कि जंगल सफारी के निर्माण से बचे-खुचे पेड़ भी कट जाएंगे, जिससे जैव विविधता का खतरा होगा। इसके अलावा, फंड की कमी के कारण परियोजना के निजीकरण की भी आशंका जताई गई है।
विरोध करने वालों के तर्क
- अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिक शुष्क है। यहां गर्मी और ठंड दोनों ही अत्यधिक पड़ती है। दूसरी जगहों वन्य जीव ये नहीं सह सकते हैं।
- यहां की वनस्पतियां कम ऊंचाई की, छोटे पत्तों वाली और कांटेदार हैं, जिसमें वन्य जीवों को भोजन नहीं मिल सकता
- यहां पानी की कमी है। कृत्रिम तरीके से पानी उपलब्ध कराने की एक सीमा है। भूजल और नहरी पानी मनुष्यों के लिए ही पर्याप्त नहीं है।
- रुखे और छोटे पत्तों वाले पेड़ पौधे के बीच छोटे जानवरों का रहना नामुमकिन है।
वन्य जीवों को भोजन और पानी की कमी
अरावली में वनीकरण की पहले भी कई योजनाएं चली हैं। यहां अरावली में छोटे पेड़-पौधे ही विकसित हो सकते हैं। वन्य जीवों को भोजन और पानी की कमी होगी। अरावली सफारी के बहाने फार्म हाउसों को सरकार अपने अधीन करेगी। फंड के अभाव में 10 हजार एकड़ इलाका निजी हाथों में जाएगा। पर्यटन के लिए निर्माण में अरावली के बचे-खुचे पेड़ भी नष्ट होंगे। - डॉ. आरपी बलवान, पूर्व वन संरक्षक
अरावली की जैव विविधता वाले हॉटस्पॉट में कई लुप्तप्राय पक्षी है। आईयूसीएन के वर्गीकरण में वे लुप्त प्राय हैं। इसमें मिस्त्र का गिद्ध, लाल सिर वाला गिद्ध, स्टेपी ईगल, एलेक्जेन्ड्रीन तोता शामिल हैं। गुरुग्राम के वन्य जीवों का कॉरिडोर फरीदाबाद मांगरबनी से असोला तक जुड़ा है। जंगल सफारी बनने से यह कॉरिडोर समाप्त हो जाएगा। - नीलम अहलूवालिया, पीपल फाॅर अरावली