गुरुद्वारों में अखंड पाठ, शबद कीर्तन और लंगर आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। वाहे गुरुजी का खालसा वाहे गुरुजी की फतेह। जो बाेले सो निहाल सतश्री अकाल। सिविल लाइंस स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में खालसा पंथ साजना दिवस पर इन्हीं शब्दों के बीच गुरु गोबिंद सिंह के संदेश गूंजे। बैसाखी के मौके पर शहर के गुरुद्वारों में धूमधाम से खालसा पंथ साजना दिवस मनाया गया। इसी दिन सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।
गुरुद्वारे में हजूरी रागी जत्था, कविसरी जत्था, भाई मुख्तियार सिंह सांगवान, यूएसए से आए गुरजंत सिंह, दिल्ली वाले भाई महिंदर सिंह, रहीस साहिब और गुरदयाल सिंह ने शबद कीर्तन किया। मुख्य ग्रंथी परगट सिंह ने गुरु गाेबिंद सिंह के जीवन और खालसा पंथ की स्थापना के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। काफी संख्या में लोगों ने पावन दिन पर लंगर में सेव की और लंगर छका। साउथ सिटी गुरुद्वार श्री साध संगत में मुख्य ग्रंथी ज्ञानी आत्मा सिंह ने गुरमत विचार प्रस्तुत किए। हजूरी रागी जत्थे से जुड़े मनप्रीत सिंह, जसवंत सिंह बलवंत सिंह, अमृतसर दरबार साहिब से आए मनिंदर सिंह और कमलजीत सिंह ने शबद कीर्तन प्रस्तुत किया। वहीं, न्यू कॉलोनी गुरुद्वारा, मदनपुरी, अर्जुन नगर गुरुद्वारा, सेक्टर 39, सेक्टर-46, पालम विहार, डीएलएफ आदि गुरुद्वारों में बैसाखी और खालसा पंथ साजना दिवस पर शबद कीर्तन और लंगर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुरुद्वारों को रंगीन बत्तियों से सजाया गया है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी प्रमुख शेरदिल सिंह सिद्धू ने आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई।
सिंगल यूज प्लास्टिक रहित लंगर का आयोजन
शहर के गुरुद्वारों में पिछले करीब 10 सालों से लंगर में प्रदूषणकारी सिंगल यूज प्लास्टिक और स्टायरोफोम की प्लेट का प्रयोग नहीं करने की परंपरा शुरू की गई है। यह परंपरा अभी भी निभाई जा रही है ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। गुरुद्वारा श्री सिंह सभा, साउथ सिटी आदि बड़े गुरु़द्वारों में लंगर के लिए स्टिल के प्लेट, चम्मच,ग्लास रखे गए हैं। साउथ सिटी वन के गुरुद्वारे में बड़े लंगरों के लिए पत्तों से बने पत्तल और लकड़ी के चम्मच प्रयोग में लाए जाते हैं। प्रबंधन कमेटी से जुड़े डीएस ओबरॉय ने बताया कि लंगर में प्रयोग किए जाने वाले पत्तलों को निष्पादन बागवानी और किचन वेस्ट प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से किया जाता रहा है। इसे ग्रीन सेवा का नाम दिया गया है। गुरुग्राम के लगभग सभी गुरुद्वारों में ग्रीन सेवा अपनाई जा रही है।