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धरने में जजपा के नेता भी हुए शामिल

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गुरुग्राम। कृषि कानूनों के खिलाफ और आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में राज्य की भाजपा सरकार की सहयोगी जननायक जनता पार्टी भले ही नहीं बोल रही है, लेकिन उसके कुछ विधायकों के बाद अब अन्य नेता खुलकर किसानों के समर्थन में सामने आने लग गए हैं। इसी कड़ी में जजपा के नेताओं ने भारत बंद के सिलसिले में झाड़सा चौक पर दिए गए धरने में शिरकत की। इतना ही नहीं, जजपा नेताओं ने कांग्रेस व आप नेताओं के साथ मंच साझा किया। यहां धरने में कई संगठन भी शामिल हुए।
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झाड़सा चौक पर झाड़सा 360 खाप एवं अन्य सामाजिक संगठनों ने मंगलवार को करीब चार घंटे तक धरना दिया। धरने का नेतृत्व खाप के अध्यक्ष चौ. महेंद्र सिंह ठाकरान ने किया। यहां पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया, बादशाहपुर क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़े कांग्रेस नेता राव कमलवीर सिंह आदि ने शिरकत की। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के दक्षिण हरियाणा के अध्यक्ष नेता एवं निगम पार्षद आरएस राठी भी शामिल हुए।
खास बात यह है कि यहां धरना स्थल पर जजपा के जिले के पूर्व अध्यक्ष सूबे सिंह बोहरा के अलावा प्रदेश इकाई के पदाधिकारी नरेश सहरावत, सुरेंद्र ठाकरान आदि ने भी दस्तक दी। इतना ही नहीं, उन्होंने कृषि कानूनों का विरोध किया और आंदोलनकारी किसानों को साथ देेने का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने भाजपा के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा।
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झाड़सा चौक पर धरने में अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के नेता धर्मबीर राठी, राष्ट्रीय महिला जाट मंच की अध्यक्ष रमा रानी राठी, प्रवक्ता नीलम गुलिया के अलावा मुकेश डागर, डॉ. सारिका वर्मा, कल्याण सिंह संधु, नवनीत रोज, डॉ. सुनीता कटारिया, गजे सिंह कबलाना, बीरू सरपंच, सुनीता सहरावत आदि भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने कृषि कानूनों को किसानों के साथ एक बड़ा खिलवाड़ बताया है।
अन्नदाता को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया : ठाकरान
झाड़सा 360 खाप के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ठाकरान ने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और इस सरकार ने उन्हें भी अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। किसानों के ऊपर कृषि कानून फरमानों की तरह लागू कर दिए हैं। जल्दबाजी में लाए गए कानूनों से यह समझ नहीं आता कि वास्तव में इनमें ऐसा कौन सा फायदा छुपा है जो भाजपा सरकार को समझ आ रहा है, लेकिन किसान उससे अनभिज्ञ है। वहीं आरएस राठी ने कहा कि एमएसपी से लेकर कांट्रेक्ट फार्मिंग तक किसानों के सवालों का किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
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