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Gurugram News: जर्जर भवन के साए में कैसे तराशे भविष्य

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व्यथा बता रहा है रावली गांव का कन्या माध्यमिक विद्यालय, मगर सपनों की खातिर आने को मजबूर छात्राएं
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पुष्पेंद्र शर्मा

फिरोजपुर झिरका। ग्राम पंचायत रावली स्थित राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय की इमारत खस्ताहाल हो चुकी है। दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। छत से प्लास्टर झड़ रहा है। कई कमरे इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बरसात के दिनों में स्कूल की पुरानी छत पर पानी भर जाता है, जो सप्ताह भरा रहता है। इससे जिससे इमारत गिरने की आशंका और भी बढ़ जाती है।


विद्यालय की इस बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले की कोई अनहोनी विद्यालय में घटित हो, सरकार और प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि जो कमरे जर्जर हो चुके हैं, उन्हें बंद कर दिया जाए। यदि विद्यालय के पास पर्याप्त कमरे नहीं हैं तो नए कमरे बनने तक स्कूल चलाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
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250 छात्राओं को पढ़ा रहे दो अध्यापक
इस विद्यालय में करीब 250 छात्राएं हैं, जिन्हें केवल दो शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। इनमें से एक अध्यापक नियमित है तो दूसरा सहायक अध्यापक है। एक तरफ सरकार नूंह जिले के शिक्षा विभाग को सम्मानित कर रही है, दूसरी तरफ जिले की वास्तविक स्थिति से यहां के अधिकारी सरकार को भ्रमित कर रहे हैं।


कई बार संबंधित अधिकारियों को इस विषय में अवगत कराया गया है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उच्च अधिकारियों ने जर्जर भवन में बच्चों को नहीं बिठाने के दिशा निर्देश जारी किए हैं। - प्रेम शर्मा, इंचार्ज, विद्यालय

इस मामले को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिले के उपायुक्त, उपमंडल अधिकारी ना0 (एसडीएम) और खंड शिक्षा अधिकारी से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राएं देश का भविष्य हैं, उनके लिए सुविधाओं के नाम पर न भवन, न स्वच्छ पेयजल, न पर्याप्त अध्यापक सीधे तौर पर इस भविष्य के साथ खिलवाड़ है। तुरंत प्रभाव से यहां पर नए भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। - चतर सिंह, एसएमसी अध्यक्ष।




जर्जर कमरों में पढ़ रहीं छात्राएं हर समय डरी और सहमी रहती हैं। वैसे तो यहां अध्यापकों की कमी अपने आप में एक बड़ा गंभीर विषय है और उस पर भवन का जर्जर होना जिले के प्रति सरकार व प्रशासन के दोगले रवैये को उजागर करने के लिए पर्याप्त है। - सद्दाम हुसैन, समाजसेवी गांव रावली।
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सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जर्जर भवनों में बच्चों को न बैठाएं। साथ ही एसएमसी समिति के प्रस्ताव लेकर विद्यालय में शौचालय, पीने के पानी, क्षतिग्रस्त भवन आदि समस्याओं का आकलन कर एस्टीमेट बनाकर भिजवाएं ताकि उच्च अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर इन समस्याओं का समाधान कराया जा सके। -चरण देव, खंड शिक्षा अधिकारी
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