गुजरात से राजस्थान के रास्ते हरियाणा की अरावली में दिल्ली तक हाईवोल्टेज लाइनों का जाल बिछा है। ये लाइनें अलग-अलग क्षमता की बताई जा रही हैं। इनमें 220 केवी, 37 केवी, 11000 केवी 66 केवी और 340 केवी की लाइने हैं। इन लाइनों के नीचे खनन हो रहा है।
अरावली की पहाड़ियों में खनन से हाईटेंशन लाइन खतरे में है। लगातार खनन के कारण पहाड़ियों पर लगाए कई बिजली टावर गिरने के कगार पर हैं। माफिया ने टावरों के आसपास तक खुदाई कर डाली है। विस्फोटकों से पत्थर खिसक रहे हैं। ऐसा ही रहा तो टॉवर को गिरने से नहीं रोके जा सकेगा और इससे देश के बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी।
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खनन माफिया का इससे कोई सरोकार नहीं कि कहां, कैसा और कितना नुकसान होगा। उसे अपनी कमाई से मतलब है। यही कारण है कि उन्हें खनन करते समय हाईवोल्टेज लाइन भी दिखाई नहीं देती। बिजली निगम के अधिकारी भी मानते हैं कि अगर हादसा हुआ तो उस लाइन को जल्दी ठीक भी नहीं किया जा सकता और नुकसान का तो आकलन भी नहीं किया जा सकता।
बता दें कि गुजरात से राजस्थान के रास्ते हरियाणा की अरावली में दिल्ली तक हाईवोल्टेज लाइनों का जाल बिछा है। ये लाइनें अलग-अलग क्षमता की बताई जा रही हैं। इनमें 220 केवी, 37 केवी, 11000 केवी 66 केवी और 340 केवी की लाइने हैं। इन लाइनों के नीचे खनन हो रहा है।
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बिजली निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यूं तो टॉवर के गिरने के आसार कम है क्योंकि इनकी गहराई पांच से दस फुट तक होती है, लेकिन विस्फोट के समय यहां स्थिति खतरनाक हो सकती है।