गुरुग्राम के आईसीसीसी मॉडल का अध्ययन करने पहुंची एसएमडीए टीम
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) के वरिष्ठ अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसएमडीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोना श्रीनिवास ने किया।
दौरे का उद्देश्य गुरुग्राम के तकनीक आधारित शहर प्रबंधन मॉडल का अध्ययन करना और सोनीपत में प्रस्तावित आईसीसीसी के लिए उसके अनुभवों को अपनाना था। जीएमडीए के स्मार्ट सिटी डिवीजन के प्रमुख सुशील कुमार ने आईसीसीसी की कार्यप्रणाली, प्रमुख सुविधाओं और एकीकृत सेवाओं के बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान लाइव डेमो के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार यह केंद्र निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन, शिकायत निवारण, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न नागरिक सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करता है। बैठक में जीएमडीए की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमन भंकर, सोनीपत की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीणा हुड्डा तथा दोनों संस्थाओं के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
1200 से अधिक कैमरों से हो रही निगरानी
अधिकारियों को बताया गया कि जीएमडीए ने सिटी सर्विलांस प्रोजेक्ट के पहले चरण में गुरुग्राम और मानेसर के 218 जंक्शनों पर 1200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं। दूसरे चरण में 258 स्थानों पर 2722 अतिरिक्त कैमरे लगाने और लगभग 300 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने की योजना पर काम चल रहा है। जीएमडीए के इंटेलिजेंट सर्विलांस नेटवर्क के माध्यम से गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस प्रतिदिन करीब 3500 ई-चालान जारी कर रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन, रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन और अन्य उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2025 में 8 लाख से अधिक ई-चालान जारी किए गए। जबकि, वर्ष 2026 में अब तक 3.43 लाख से अधिक ई-चालान जारी किए जा चुके हैं। आईसीसीसी के माध्यम से नगर निगम गुरुग्राम की 2000 और जीएमडीए की 878 स्मार्ट स्ट्रीट लाइट की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।
कचरा प्रबंधन और एआई आधारित निगरानी पर जोर
अधिकारियों को बताया गया कि बंधवाड़ी लैंडफिल साइट और अन्य कचरा संग्रहण स्थलों पर लगाए गए 45 सीसीटीवी कैमरे और 26 स्मार्ट फ्लडलाइट्स को भी आईसीसीसी से जोड़ा गया है। भविष्य में पुलिस डेटाबेस, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों को जोड़कर एक व्यापक सिटी डेटा बैंक विकसित करने तथा अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और डेटा विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की योजना भी साझा की। मोना श्रीनिवास ने विभिन्न विभागों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने का यह प्रयास अन्य शहरों के लिए भी उपयोगी मॉडल साबित हो सकता है।