गुरुग्राम की तकरीबन 35 लाख से अधिक की आबादी के लिए प्रतिदिन 686 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) पानी की जरूरत है। शहर के पास अपना भूमिगत जलभंडार नहीं है। शहर तक पानी लाने के लिए यमुना नदी से दो नहरें बनाई गई हैं। इसके बाद भी अभी 570 एमएलडी पानी की आपूर्ति ही हो पा रही है। भीषण गर्मी में पानी की मांग और आपूर्ति के 116 एमएलडी के अंतर ने निवासियों की दिनचर्या से लेकर मिजाज तक को भी प्रभावित किया है।
शहर में पानी की आपूर्ति करने वाली एकमात्र संस्था गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) है। बसई स्थित जल शोधन संयंत्र पर पश्चिमी यमुना नहर से 69 किलोमीटर का चैनल बनाकर पानी लाया जाता है। इसी प्रकार चंदू बुढेरा जल शोधन संयंत्र पर 65 किलोमीटर के एनसीआर चैनल के माध्यम से पानी पहुंचता है। यहीं से शहर के सभी 115 सेक्टरों में पानी की आपूर्ति होती है।
कितना पानी दे रहे जल शोधन संयंत्र:
- बसई संयंत्र पर 90 एमएलडी क्षमता की तीन यूनिट हैं। कुल 270 एमएलडी पानी आपूर्ति होती है
- चंदू बुढेरा पर 100 एमएलडी क्षमता की तीन यूनिट से 300 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है
जीएमडीए से कौन कितना पानी लेता है
- 71 फीसदी पानी नगर निगम लेता है।
- 10 फीसदी पानी डेवलपर, बिल्डर (जिन्होंने डिस्ट्रिक्ट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लाइसेंस ले रखा है) लेते हैं
- 10 फीसदी पानी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, एचएसआईआईडीसी और दूसरी स्थानीय एजेंसी लेती हैं
- 10 फीसदी पानी सीएलयू (चेंज इन लैंड यूज) अधिकार हासिल करने वाले करते हैं।
समस्या कहां है और क्यों
पीने के पानी से निर्माण और कारों की धुलाई
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता इंफ्रा टू डिवीजन अभिनव वर्मा कहते हैं कि भीषण गर्मी में पानी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। हम केवल पीने के पानी की आपूर्ति करते हैं, लेकिन इस पानी से निर्माण कार्य किया जा रहा है। कारों की धुलाई और अन्य इसी प्रकार के कार्यों में पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है। कुछ आपूर्ति की समस्या स्थानीय स्तर पर पैदा हो रही होती है। सोसाइटी के बिल्डर या रखरखाव करने वाली एजेंसी ने अपनी सोसाइटी में अगर सप्लाई सिस्टम को व्यवस्थित नहीं किया है, तो भी परेशानी होगी।
बोले अधिकारी:
पीने के पानी का दुरुपयोग करने वालों पर सख्त जुर्माने का प्रावधान है। नगर निगम इस पर नजर रख रहा है। जल्द ही इस पर व्यापक अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।- एसएस रोहिल्ला, जनसंपर्क अधिकारी, नगर निगम