गुरुग्राम के चर्चित सात वर्षीय छात्र प्रिंस हत्याकांड में हरियाणा पुलिस के चार पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंचकूला में सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव ने मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए केस को विशेष न्यायाधीश की अदालत में भेज दिया है।
आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने एक निर्दोष स्कूल बस कंडक्टर अशोक कुमार को फंसाने के लिए न सिर्फ फर्जी सबूत तैयार किए बल्कि थर्ड डिग्री टॉर्चर के जरिये उससे जबरन जुर्म कबूल करवाया। कोर्ट ने माना है कि प्रथम दृष्टया आरोपी अधिकारी गंभीर अपराधों के दोषी नजर आते हैं।
सीबीआई जांच में खुलासा, पुलिस ने साजिशन कंडक्टर को फंसाया
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि पुलिस ने साजिशन बस कंडक्टर अशोक कुमार को फंसाया और असली गुनहगार को बचाने की कोशिश की। एजेंसी ने जनवरी 2021 में चार पुलिसकर्मियों नरेंद्र सिंह खटाना (41), बिरेम सिंह (60), शमशेर सिंह (64) और सुभाष चंद (62) के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को लगाई फटकार
चारों पुलिसकर्मी फिलहाल जमानत पर हैं। शुरू में हरियाणा सरकार ने इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इन्कार कर दिया था लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। 24 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने सरकार के इनकार को मनमाना करार देते हुए मामले की फिर से समीक्षा करने के आदेश दिए।
अब आगे क्या...
चूंकि आईपीसी की धारा 194 जैसे मामलों की सुनवाई केवल विशेष न्यायाधीश ही कर सकते हैं। लिहाजा कोर्ट ने केस उच्च अदालत को सौंप दिया है। अब यह केस 1 अक्तूबर को पंचकूला स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश होगा।
यह था मामला
यह मामला 8 सितंबर 2017 का है। गुरुग्राम के एक नामी स्कूल के वॉशरूम में सात साल के छात्र की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद हरियाणा पुलिस ने स्कूल बस कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार कर मामले का पटाक्षेप करने की कोशिश की। मामले के तूल पकड़ते ही पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन होने लगे। मृतक छात्र के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद हरियाणा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी।