लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर
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प्रवासी मजदूरों से पंजीकरण के लिए वसूल रहे 100 रुपये, उठा रहे मजबूरी का फायदा
प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए भले हरियाणा सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की है, लेकिन इसकी जटिलता और अंग्रेजी भाषा उनके लिए मुसीबत बनी है। इसका लाभ कुछ मौकापरस्त लोग उठा रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें अंग्रेजी आती नहीं है और मोबाइल में इंटरनेट भी नहीं है। ऐसे में 100 रुपये देकर पंजीकरण कराना पड़ रहा है। इनकी सर्वाधिक सक्रियता ज्योति पार्क, राजेंद्रा पार्क, स्वरूप गार्डन, सरहौल गांव, नाथूपुर, मारुति कुंज, आईएमटी मानेसर आदि में है।
सूरत नगर, ज्योति पार्क समेत बाहरी इलाकों में चल रहा धंधा
जिले में ऐसे कई समूह सक्रिय है, जो अब तक सैकड़ों लोगों का पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकरण कराने के साथ मजदूरों को घर भेजने की गारंटी भी दी जा रही है। सरकार की ओर से दी गई सुविधा में चल रही धांधली की भनक न तो पुलिस को है और न ही प्रशासन को। इसका बखूबी फायदा उठाकर वे प्रवासी मजदूरों की जेब ढीली करा रहे है। हरियाणा सरकार की ओर से प्रवासी मजदूरों को गृह जिला भेजने के लिए पोर्टल edisha.gov.in शुरू किया गया है।
लॉकडाउन के दौरान फंसे प्रवासियों को उनके राज्यों में भेजने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी जा रही है। यह सुविधा आपदा प्रबंधन कानून के तहत राज्य सरकारें दे रही हैं। इसके एवज में पैसा लेना गैरकानूनी है। दो अप्रैल को इसी तरह के पंजीकरण से संबंधित फॉर्म के एवज में पैसे लेने के मामले में गुरुग्राम पुलिस ने दो मामले दर्ज किए थे।
ऑनलाइन भी ले रहे हैं भुगतान
ज्यादा से ज्यादा लोगों को ठगने के लिए इस काम में लगे लोगों ने ऑनलाइन भुगतान की सुविधा दे रखी है। फोन पर व्हाटस एप के जरिए अपने दस्तावेज भेजने के बाद ये पेटीएम, फोन पे, गूगल पे के जरिये ऑनलाइन भुगतान लेकर उनका नंबर पंजीकृत कर देते हैं।
पंजीकरण फार्म के नाम मची थी भगदड़
बीते शनिवार मानेसर के खोह गांव स्थित सरकारी स्कूल में श्रमिकों के पंजीकरण के नाम पर भगदड़ मच चुकी है। इसमें गांव के सरपंच और पंचायत सचिव ने आसपास के गांवों में रहने वाले दूसरे राज्यों के श्रमिकों को पंजीकरण की सूचना दी थी। इस वजह से सैकड़ों लोग यहां पहुंच गए थे। इस मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जा रही है।