एके श्रीवास्तव को अस्पताल ले जाते कर्मी
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बृहस्पतिवार को अरुण श्रीवास्तव के दाहिने पांव पर छत का लेंटर सीधा गिर गया था। इसके कारण वह निकल भी नहीं पा रहे थे। मलबा इतना ज्यादा था कि उसे उठाना भी कठिन था। इस बीच एक सुझाव यह आया कि श्रीवास्तव के पांव को काटकर उन्हें बाहर निकाल दिया जाए। इस सुझाव पर अमल करने से पहले सिविल सर्जन की टीम से इस पहलू पर विचार करने के लिए कहा गया, लेकिन डॉक्टरों ने पांव न काटने का फैसला लिया। मलबा हटाने के दौरान अरुण श्रीवास्तव को तरल पदार्थ और बेहोश रखने वाली दवाएं दीं, जिससे उनको दर्द का अहसास न हो। रात भर मलबा हटाने का काम चलता रहा। शुक्रवार को एनडीआरएफ की टीम ने एक बार फिर से सलाह दी कि अरुण श्रीवास्तव के पैर को काट दिया जाए, जिससे उनकी जान बचाई जा सके। इसके बाद सिविल सर्जन की टीम ने एक बार फिर से स्थितियों का परीक्षण किया।