सूट-साड़ी और सेल्फी...हर पीढ़ी पर चढ़ा तीज का सुरूर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। समय का पहिया भले ही घूम गया हो और कामकाजी व्यस्तताओं के कारण नई पीढ़ी के पास वक्त की कमी हो गई हो, लेकिन त्योहारों को लेकर उनका उत्साह आज भी पुरानी पीढ़ी जैसा ही बरकरार है। इस बार हरियाली तीज के पावन अवसर पर एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है, जहां दादी का पारंपरिक जोश और पोती का आधुनिक स्वैग मिलकर इस उत्सव में टशन का तड़का लगा रहे हैं। परंपरा और आधुनिकता की यह जुगलबंदी समाज में एक खूबसूरत मिसाल पेश कर रही है।
डिजिटल युग और मॉडर्न थीम से सजी तीज बदलते समय के साथ त्योहार मनाने का अंदाज भी डिजिटल और हाईटेक हो गया है। आगामी 8 अगस्त को आयोजित होने वाले वैश्य लेडीज क्लब के हरियाली तीज उत्सव में इस बदलाव को साफ देखा जा सकता है। यहां तीज के पारंपरिक गीतों के साथ-साथ हरियाली तीज की थीम पर आधारित तंबोला और विभिन्न मजेदार गेम्स का आयोजन किया जाएगा, ताकि कामकाजी और युवा महिलाएं भी कम समय में त्योहार का पूरा आनंद ले सकें।
सेक्टर-10 की रहने वाली 75 वर्षीया शम्मी अहलावत इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। वे उम्र के इस पड़ाव पर भी पूरे जोश के साथ अपनी बहू और पोती को लेकर मंगलवार को दिल्ली के पीतमपुरा में आयोजित तीज उत्सव में शामिल हुईं। शम्मी जी का यह सफर यहीं नहीं रुकने वाला, वे आगामी 13 अगस्त को अपने शहर में होने वाले भव्य तीज उत्सव में भी अपनी बहू-पोती के स्वैग के साथ टशन दिखाने को तैयार हैं। दयानंद कॉलोनी की सुनीता यादव और उनकी सास माया देवी झज्जर में अपने गांव की हरियाली तीज याद करते हुए बताती हैं कि गांव में इस दिन चने बोने का रिवाज था। घर में पकवान बनते थे। उनकी पुत्री रवीना भले ही उन परंपराओं को उस तरह न निभा पाए मगर मायके से पहुंचे नए परिधान, मेंहदी, घेवर, सास और ससुराल के उपहार के साथ हरियाली तीज का उत्सव मनाएगी।
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तीज के संगम में दिखता है पीढ़ियों का संगम
मैंं, मेरी बहु कैप्टन कविता अहलावत और पोती फ्रेया सब मिलकर हरियाली तीज के पारंपरिक उत्सव में शामिल होते हैं। मैं खुद 75 साल की हो गई हूं मगर हरियाली तीज उत्सव का उत्साह भरपूर है। -शम्मी अहलावत, सेक्टर 10
मेरे साथ मेरी बेटियां ज्योति और कविता के साथ पोती इशिका हरियाली तीज के आयोजन में मुख्य भूमिका निभाती है। आधुनिकता के बावजूद बच्चों में मेलजोल के उत्सवों को लेकर उमंग रहता है। -शारदा लाहौरिया, सेक्टर 28
हमें पारंपरिक रूप से त्योहार की खुशियां साझा करने की सीख मिली है। मेरी नानी गुलाब देवी, मां बाला देवी और मैं पूरे रीति रिवाजों के साथ हरियाली तीज की खुशियां मनाती रही हैं। -अंकिता ठाकरान इस्लामपुर, सेक्टर 38