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Gurugram News: ग्रीन बेल्ट में डाल रहे हैं अशोधित पानी जीएमडीए ने जताई चिंता

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ग्रीन बेल्ट में डाल रहे हैं अशोधित पानी जीएमडीए ने जताई चिंता
-इजाजत दी गई थी शोधित पानी से सिंचाई की मगर डाला जा रहा अशोधित पानी
संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम। ग्रीन बेल्ट में सीवेज का गंदा पानी डाला जा रहा है। वह भी बाकायदा पाइप लाइन बिछा कर। इस पर चिंता किसी आरडब्ल्यूए या निवासी की नहीं जीएमडीए के एडिशनल सीईओ (शहरी पर्यावरण ) सुभाष यादव ने जताई है। एक फोटो के साथ उन्होंने चिंता जताई है कि सिंचाई के लिए सोसाइटियों को ग्रीन बेल्ट पर सीवेज ट्रीटेड पानी देने की इजाजत दी गई थी, मगर वहां अशोधित गंदा सीवेज का पानी डाला जा रहा है। यह ग्रीन बेल्ट और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।
हमलोगों ने उन सोसाइटियों की सहायता उपलब्ध कराई जो अपने सीवेज ट्रीटेड वाटर का उपयोग नहीं कर पा रहे थे। मगर वे शोधित पानी के बजाए अशोधित पानी ही ग्रीन बेल्ट पर फेंकने लगे। यह एक बहुत ही दुखद स्थिति है कि एसटीपी शोधित पानी की लाइन गुणवत्तापूर्ण नहीं है। इन्हें प्रशासनिक तौर पर तकनीकी सहायता की जरूरत है। इस पानी से सड़क टूट रही है। दूसरी ओर एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर सूचना दी है कि पिछले 3 दिनों से सीवेज ट्रीटेड पानी की पाइप लाइन टूटने के कारण सड़क पर पानी बह रहा है। यह एसटीपी की लाइन ग्रीन बेल्ट पर सिंचाई के लिए लगाई गई थी मगर उसकी वह पानी फुटपाथ और सड़क पर बह रहा है। जीएमडीए के एडिशनल सीईओ ने इसको लेकर भी चिंता जताई है। यह लाइन सेक्टर 92 की बताई जा रही है।
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सेक्टर 82 में सीवेज का गंदा पानी ड्रेनेज लाइन में

सेक्टर 82 में सोसाइटियों के सीवेज लाइन की पानी को ड्रेनेज लाइन में बहाए जाने और ड्रेनेज के साथ नहीं जोड़ पाने की स्थिति में एक कच्ची सड़क पर सीवेज के पानी के जल जमाव की शिकायत नवदीप सिंह ने ट्वीट के माध्यम से की है। नवदीप ने बताया कि सेक्टर 82 में सीवेज लाइन का पानी एक अधबनी कच्ची सड़क पर जमा हो रहा है। सीवेज का गंद ड्रेनेज लाइन में डाला जा रहा है। सीवेज का गंदा पानी फेंके जाने की शिकायत लोग करते रहे हैं मगर अब अधिकारी ही इसकी शिकायत कर रहे हैं। लोगों ने शिकायत पर कार्रवाई की अपील की है।
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मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की संयोजक गौरी सरीन ने कहा कि उनके संगठन ने कुछ अन्य संगठनों, आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर झाड़सा बांध पर पौधरोपण किया, वहां आस-पास की सोसाइटियों को सीवेज ट्रीटेड वाटर डालने की इजाजत दी मगर पानी सिंचाई के लिए जरूरी पानी की तुलना में बहुत ज्यादा पानी डाला जाने लगा। इससे पौधे खराब होने लगे और अन्य कई तरह की दिक्कतें होने लगी है।
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