पातली रेलवे स्टेशन की रेलवे ट्रैक पर बैठ कर प्रदर्शन करते किसान।
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गुरुग्राम। सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि सुधार कानूनों के विरोध में बृहस्पतिवार को जिले के किसानों ने पातली रेलवे स्टेशन पर 4 घंटे तक शांतिपूर्वक धरना दिया। रेल रोको आंदोलन के तहत पातली रेलवे स्टेशन पर डटे किसान बीच-बीच में पटरियों पर भी जाते रहे लेकिन इससे यात्री ट्रेनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा और ट्रेनों की आवाजाही सामान्य रूप से चलती रही। हालांकि, बरेली-भुज एक्सप्रेस करीब ढाई घंटे तक गुरुग्राम रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही। इस दौरान यात्री परेशान रहे।
रेल रोको आंदोलन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए तय योजना के तहत बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे से किसान पातली रेलवे स्टेशन पर पहुंचने लगे थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या सैकड़ों में पहुंच गई। इसके बाद दोपहर 12 बजे से किसानों ने धरना शुरू कर दिया। किसान बीच-बीच में रेलवे ट्रैक का भी रुख करते लेकिन फिर शांतिपूर्वक धरना देने लगते। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। किसानों के धरने को देखते हुए बृहस्पतिवार को दिन भर पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। किसी भी असामान्य स्थिति से निबटने के लिए पातली स्टेशन पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया था। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी किसानों के रेल रोको कार्यक्रम पर बारीकी से नजर बनाए रहे।
इसलिए पातली रेलवे स्टेशन पर जुटे किसान :
पातली रेलवे स्टेशन के नजदीक ही अडानी समूह का अडानी लॉजिस्टिक पार्क स्थित है, जिसमें प्रवेश करने वाले रेलवे ट्रैक को जाम करने की नीयत से किसानों ने धरने के लिए उक्त स्टेशन को चुना। किसान अडानी लॉजिस्टिक पार्क के गेट पर बैठे रहे और सरकार विरोधी नारेबाजी करते रहे। हालांकि, किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए लॉजिस्टिक पार्क में जाने वाली सभी ट्रेनों को पहले ही रोक दिया गया था। मालूम हो कि सरकार की तरफ से लाए गए कृषि सुधार कानूनों को किसान शुरू से ही किसान विरोधी व पूंजीपति हितैषी बताते रहे हैं। अडानी लॉजिस्टिक पार्क के समीप बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
ये किसान संगठन रहे मौजूद :
विरोध प्रदर्शन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन, ऑल इंडिया किसान यूनियन के किसान मौजूद रहे। इसके अलावा आसपास के इलाके से भी स्वतंत्र रूप से किसान धरने में पहुंचे और सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अवसर पर किसान मोर्चा के अध्यक्ष संतोख सिंह ने बताया कि सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। तानाशाही रवैया अपनाकर किसानों पर कृषि कानून थोपे जा रहे हैं। ये 3 कृषि कानून सरकार ने पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ही बनाए हैं। यदि ये कानून लागू हो जाते हैं तो किसान, मजदूर और गरीब बर्बाद हो जाएगा। सरकार पूंजीपतियों पर पूरी तरह से मेहरबान है।