फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस्तावेजों पर नंबर तक दर्ज नहीं, कैसे हो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच : अदालत

विज्ञापन
विज्ञापन
-अदालत से-
विज्ञापन

पुलिस आयुक्त को नियम की अनुपालना के लिए अदालत ने भेजा पत्र
मानेसर में हुए श्रमिकों के बवाल में आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने की टिप्पणी

विराट त्यागी
गुरुग्राम। मानेसर में हुए श्रमिकों के बवाल में आरोपी अंकित कुमार को जमानत देते हुए अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस मामले में पुलिस की तरफ से जो दस्तावेज दिए गए हैं, उन पर नियमानुसार नंबर ही दर्ज नहीं हैं। यह रवैया पुलिस की निष्पक्षता, प्रामाणिकता, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। अदालत ने कहा कि विशेष रूप से इस प्रकार की घटनाएं न केवल किसी पक्षों को प्रभावित करती हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापक रूप से समाज को भी प्रभावित करती हैं। अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने मामले में पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर नियमों का पालन करने को कहा है।
अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत में श्रमिकों के बवाल को लेकर सुनवाई चल रही थी। बीते नौ अप्रैल 2026 को रिचा ग्लोबल एक्सपोर्ट कंपनी के सहायक महाप्रबंधक रामबीर सिंह ने आईएमटी मानेसर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि बीते तीन-चार दिनों से उनकी तीनों कंपनियों के श्रमिक अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन की तरफ से वहां पर पुलिस बल भी मौजूद था। सुबह करीब साढ़े 10 बजे करीब 200 लोगों ने कंपनी पर पथराव करने के साथ ही पुलिस वाहनों में आगजनी कर दी थी। इस दौरान उनकी दो महिला कर्मियों के साथ भी मारपीट की गई थी।
विज्ञापन


बचाव पक्ष की तरफ से अदालत में दलील दी गई कि वह 10 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। वह किसी भी यूनियन में शामिल नहीं है। जो मोबाइल उसके पास से पुलिस ने बरामद किया वह भी उसका नहीं है। किसी भी सीसीटीवी में वह नहीं दिखाई दिया। अन्य दर्ज हुए मामलों में आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
विज्ञापन


अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि पथराव और आगजनी के दौरान आरोपी मौके पर ही मौजूद था। इस हादसे में नौ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। आरोपी मूल रूप से झारखंड का रहने वाला है। वह जमानत के बाद भाग सकता है। आरोपी भड़काऊ भाषण देने में भी शामिल था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि आरोपी के पास से जब्त की गईं दोनों सिम से ऐसे कोई भी मैसेज नहीं भेजे गए। जांच अधिकारी अदालत में उसकी तरफ से भेजे गए मैसेज भी पेश नहीं कर सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें