-यात्रियों को रोजाना झेलनी पड़ रही परेशानियां, जमीन पर सहमति न बनने का भुगत रहे खामियाजा
रिजवान खान
नूंह। नूंह की राजधानी कहे जाने वाले बड़कली चौक पर बीते करीब 20 वर्षों के बावजूद बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका है। जगह के अभाव और जमीन को लेकर सहमति न बनने के कारण यह योजना बार-बार अधर में लटक जाती है। नतीजतन, हजारों यात्रियों को हर रोज अव्यवस्था और जोखिम के बीच सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बड़कली चौक पर बस स्टैंड न बनने का मुख्य कारण जमीन का अभाव बताया जा रहा है। विभाग द्वारा कई बार प्रयास किए गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई। लोगों के जमीन देने से इंकार करने के कारण यह परियोजना कागजों तक ही सीमित रह गई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी, बस स्टैंड निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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बसों के लिए तय स्थान नहीं, यात्रियों में अफरा-तफरी :
चौक पर बसों के रुकने का कोई निश्चित स्थान नहीं है। हालांकि, यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय सारणी का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन बस स्टैंड के अभाव में इसका खास फायदा नहीं मिल पा रहा। बस आते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच जाती है और लोग दौड़कर बस पकड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
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बुजुर्ग और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी :
अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। बस में चढ़ने के लिए भागदौड़ करना उनके लिए मुश्किल साबित होता है। कई बार सीट पाने के चक्कर में उन्हें चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।
- हादसों का बढ़ता खतरा :
भीड़भाड़ और अव्यवस्थित बस संचालन के चलते सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार बस पकड़ने के प्रयास में लोग सड़क पर दौड़ते हुए दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
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तीन राज्यों को जोड़ने वाला अहम केंद्र :
बड़कली चौक हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जंक्शन है। जिले के बीच स्थित होने के कारण यहां से हर रोज हजारों लोग गुरुग्राम, दिल्ली और अलवर की ओर यात्रा करते हैं।
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विभाग द्वारा कई बार बस स्टैंड के लिए जगह मांगी गई है लेकिन अभी तक जगह नहीं मिल पाई। जगह ना मिलने के कारण बस स्टैंड बनाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। अगर विभाग को जगह मिल जाती है तो जल्द बस स्टैंड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- कुलदीप जांगड़ा, जीएम हरियाणा रोडवेज।
हम पिछले कई सालों से बस स्टैंड की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। रोजाना बस पकड़ने के लिए भागना पड़ता है, जिससे बहुत परेशानी होती है।
- मुबारिक अटेरना, समाजसेवी।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यहां बस पकड़ना बहुत मुश्किल है। अगर बस स्टैंड बन जाए तो काफी राहत मिलेगी।
- सबीला जंग, समाजसेवी।
जिले के विभिन्न गांवों के छात्रों को रोज कॉलेज जाने के लिए यहीं से बस लेनी पड़ती है। बसों का कोई तय स्टॉप नहीं है, जिससे कई बार उनकी बस छूट जाती है।
- तौसीफ बिसरु,
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यह चौक तीन राज्यों को जोड़ता है, यहां बस स्टैंड होना बहुत जरूरी है। सरकार को इस ओर जल्द ध्यान देना चाहिए।
- रशीद अहमद, अधिवक्ता।