गुरुग्राम। नाबालिग की वीडियो को तोड़-मरोड़कर प्रसारित करने के मामले में अब सात मई को सुनवाई होगी। पीड़ित के अधिवक्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में आरोपी दीपक चौरसिया, चित्रा त्रिपाठी, अजीत अंजुम, ललित सिंह, सुनील दत्त, अभिनव राज को पेश होना था। अदालत ने उनके जमानती वारंट जारी किए हुए थे, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए। अधिवक्ताओं ने आग्रह किया कि इस मामले की सुनवाई किसी अन्य अदालत में कराई जाए। अधिवक्ता के आग्रह को स्वीकार करते हुए इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत में हुई। अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने अदालत को बताया कि पिछले आदेश के अनुसार सभी आरोपियों के जमानती वारंट 25 मार्च के लिए जारी किए गए थे, लेकिन कोई भी आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ।
अधिवक्ता ने आशंका जताई कि एक भी आरोपी का पेश न होना, उनकी समझ से बाहर है। अधिवक्ता ने अदालत में अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि उनकी दलीलों को अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, हालांकि अदालत ने कोई आदेश पारित नहीं किया और उनकी दलीलों को रिकॉर्ड में दर्ज करने का आश्वासन अवश्य दिया। इस मामले की पैरवी कर रहे जन जागरण मंच के अध्यक्ष हरि शंकर का कहना है कि जमानती वारंट होने के बावजूद आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए। यह मामला पॉक्सो एक्ट से संबंधित है। गौरतलब है कि दो जुलाई 2013 को पालम विहार क्षेत्र के सतीश कुमार (काल्पनिक नाम) के घर संत आसाराम बापू आए थे। बापू ने परिवार के सदस्यों सहित उनकी 10 वर्षीय भतीजी को भी आशीर्वाद दिया था। उस समय सतीश के घर के कार्यक्रम की वीडियो बनाई गई थी। आसाराम प्रकरण के बाद टीवी चैनलों ने बनाई गई वीडियो को प्रसारित किया था। परिजनों ने आरोप लगाए थे कि उनकी और आसाराम बापू की छवि धूमिल करने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया गया था। जिससे परिवार व मासूम बालिका को मानसिक व सामाजिक रुप से कष्ट झेलना पड़ा था। आहत होकर परिजनों ने पालम विहार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।