गुरुग्राम। प्रशासन की तरफ से भले ही बर्ड फ्लू को लेकर तमाम एहतियात बरतने की बात कही जा रही हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि पक्षियों के मरने को काफी हलके में लिया जा रहा है। पार्कों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा व सुविधा के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। पार्क में मर रहे पक्षियों पर बिना नमक व अन्य केमिकल डाले साधारण तौर पर पार्क में ही दबाया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए न तो दस्ताने और न ही पीपीई किट की व्यवस्था की गई है।
सेक्टर-52 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में कार्यरत कर्मचारी को बिना दस्ताने और अन्य सुरक्षा मानकों के मरे पक्षियों को दबाते देखा गया। चिंता की बात यह भी है कि पक्षियों को दबाने के लिए गहरा गड्ढा तक नहीं किया जा रहा है। प्रशासन को यह पता ही नहीं है कि किन-किन जगहों पर कितने पक्षी मर चुके हैं। शहर के पार्कों की देखभाल में लगे कर्मचारियों की बात से ही यह स्पष्ट हो रहा है कि पशुपालन व वन्य जीव संरक्षण विभाग के पास पक्षियों की मौत की स्पष्ट जानकारी नहीं है।
एक सप्ताह में 100 से 200 पक्षियों की मौत का दावा
सेक्टर-52 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क के कर्मचारियों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान कई पक्षियों की मौत हो चुकी है। इसमें कौवे, बगुले, चिड़िया, चमगादड़ व अन्य पक्षी शामिल हैं। सेक्टर-52 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क के एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में करीब कई कौवे मर चुके हैं। इसके अलावा बगुले भी मरे हैं। इससे पहले सोमवार को वन विभाग कार्यालय परिसर में ही एक चमगादड़ मृत अवस्था में मिला था।
कई मृत पाए गए पक्षी
मंगलवार को भी सेक्टर-52 स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में करीब आधा दर्जन से ज्यादा पक्षी मृत पाए गए। वहीं कौवे, चिड़िया समेत कई पक्षी ऐसे थे जो जिंदा तो थे लेकिन उड़ नहीं पा रहे थे। लगातार हो रही पक्षियों के मरने को लेकर स्थानीय निवासी खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तो पार्क में जाने से भी डर लग रहा है। भले ही बर्ड फ्लू को लेकर तमाम सावधानियां बरती जा रही हों लेकिन वन्य जीव संरक्षण व पशुपालन विभाग प्राथमिक तौर पर पक्षियों के मरने के लिए ठंड को ही जिम्मेदार मान रहा है।
वन्य जीव अभयारण्य व चिड़ियाघरों में सभी तरह के सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा है। वन विभाग व संबंधित विभागों को सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन कराने को लेकर निर्देशित किया जाएगा। हमारी तरफ से किसी भी स्तर पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं की जा रही है।
- एमएस मलिक, मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव)