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बागबानी बोर्ड में 48.60 लाख रुपये का गबन, मुकदमा दर्ज

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गुरुग्राम। सेक्टर-18 थाना क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) में सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके विभाग के ही एक कर्मचारी द्वारा 48.60 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में विभाग के संयुक्त आयुक्त पुष्पेंद्र आर्य द्वारा आरोपी अनूप कुमार सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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रिपोर्ट में कहा है कि एनएचबी का इंस्टीट्यूशनल एरिया सेक्टर-18 में कार्यालय है। जिले के प्रताप नगर में रहने वाला अनूप कुमार 2009 से विभाग में काम कर रहा है। विभाग के द्वारा 2014 में मिशन फॉर इंटीग्रेेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर कार्यक्रम के लिए कुछ एजेंसियों के माध्यम से संविदा पर कर्मचारी, टेक्निकल सपोर्ट ग्रुप स्टाफ रखा गया था। यह स्टाफ किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत कार्य कर रहा था। इस स्टाफ की उपस्थिति सूची कल्याण विभाग ने एनएचबी को भेजी थी। आरोपी अनूप कुमार के हाथ यह सूची लग गई, जिसके बाद उसने इसमें कुछ नाम सूची में जोड़कर फर्जी स्टाफ के भुगतान का पैसा बोगस खातों में जमा करा लिया। भुगतान में अनियमितता होने के चलते कुछ एजेंसियों ने सीधे भुगतान करने की मांग की थी। जिसके बाद विभाग का ध्यान इस ओर गया। जब विभाग की ओर से इस मामले में छानबीन की गई तो यह पूरा मामला खुला। इस मामले की विस्तार से जांच की गई तो पता चला कि कुल 48 लाख 60 हजार 594 रुपये के सरकारी धन का गबन किया जा चुका था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सरकारी धन के गबन के मामले में विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। गबन के लिए 10 बैंक खाते खोले गए थे। जिन नामों के साथ खाते खोले गए हैं, वह भी फर्जी नाम और फर्जी दस्तावेज के आधार पर खोले गए थे। इस मामले में धारा 420, 465, 468 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच में कई बड़ों के नाम भी हो सकते हैं उजागर
गुरुग्राम। बागवानी में 48 लाख से अधिक के गबन का मामला सामने आने के बाद पुलिस जिन बिंदुओं पर जांच कर रही है। उसमें संबंधित विभागों के कुछ और बड़े नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है कि बैंक खाते खोलने के समय किन-किन लोगों के दस्तावेज लगाए गए थे और क्या इन दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन संबंधित अधिकारियों के द्वारा किया गया था या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि बागवानी बोर्ड के कर्मचारियों के अलावा संविदा स्टाफ उपलब्ध कराने वाली एजेंसी और कुछ वित्तीय संस्थान इस कांड में शामिल तो नहीं हैं।
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