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Gurugram News: बुरा न मानो होली है ...नूंह में दिखता है हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का रंग

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- एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी-खुशी होली मनाते हैं दोनों संप्रदाय के लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मेवात को लेकर तरह-तरह की बातें भले ही होती हों, लेकिन मेवात अभी भी भाईचारा व हिंदू-मुस्लिम संस्कृति की डोर में बंधा हुआ है। यहां गंगा-जमुनी तहजीब जिंदा है। इसकी बानगी तीज-त्योहारों पर नजर भी आती है। इन त्योहारों में होली भी ऐसा पर्व है जहां हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी मनाते हैं। इतना ही नहीं यहां आज भी होली मिलन कार्यक्रमों का चलन है। जिसमें दोनों संप्रदाय के लोग इकट्ठे होकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं और मिठाई खिलाते हैं। हालांकि एकलता के चलते पिछले कुछ वर्षों में होली खेलने व गाने का चलन कम जरूर हुआ है। लेकिन यहां दोनों की संप्रदाय के बुजुर्गों को अभी भी होली की वो चौपाई याद हैं जिन्हें वो अपने गांव की चौपाल व चौक-चौराहों पर इकट्ठे होकर एक साथ गाते थे। इतना ही नहीं मालब-घासेड़ा सहित दर्जनों मुस्लिम बाहुल्य गांवों में आज भी गांव के अंदर बने चौकों का नाम होली चौक है।
मेव पंचायत के प्रवक्ता मोहम्मद कासिम मेवाती कहते हैं यह हमारी साझी संस्कृति है जिसके कभी मिटाया व भुलाया नहीं जा सकता। धर्म भले ही अलग-अलग है, लेकिन भाईचारा आज भी कायम हैं। दोनों पक्षों की तरफ से होली के साथ-साथ अन्य त्योहार भी एक-दूसरे के साथ मिलकर मनाते हैं। मेवात में होली ही नहीं दीवाली व ईद मिलन समारोह भी मनाए जाते हैं। हाल की में किशनगढ़-खैरतल में दो दिवसीय होली मिलन समारोह आयोजित किया जा रहा है। जिसमें दोनों समुदाय के लोग इकट्ठा होंगे। एक-दूसरे को गले लगाकर होली मनाएंगे। चंदेनी के आसिफ बताते हैं होली के साथ-साथ दीवाली से पहले होने वाली रामलीला में आज भी कलाकार से लेकर दर्शक में बड़ी संख्या मेव समाज की होती है। आज भी गांवों में होली चौक हैं और होली दहन व होली खेलते हैं। यह साझी संस्कृति है इसे खत्म नहीं किया जा सकता। फिरोजपुर झिरका में पूर्वमंत्री आजाद मोहम्मद रामलीला कमेटी के संरक्षक हैं तो वो रामलीला के लिए अपने निजी कोष से दान भी देते हैं।
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नूंह में धूृमधाम से मनाई जाती है होली :

नूंह में होलिका की पूजा की जाती है इसके लिए एक होली दहन स्थल चिन्हित किया हुआ है। जहां पर होलिका दहन से पहले लकड़ी, फूंस का अंबार लगाया जाता है। तय समय के अनुसार फिर महिलाएं व बच्चे नए कपड़े पहनकर यहां पहुंचते हैं। शाम को होलिका दहन होता है।

पुन्हाना-पिनगवां में बृज होली :

नूंह जिले का पुन्हाना व पिनगवां कस्बा बृज से सटा हुआ है। यहां यूपी की बृज होली के गीत-संगीत के साथ एक-दूसरे को रंग लगाते नजर आते हैं। यहां भी नजारा हिंदू-मुस्लिम एकता वाला होता है। सिंगार, बिछौर, नई सहित कई गांव ऐसे हैं जहां दोनों आबादी अच्छे से होली में रंग में रंग जाती है। हालांकि अब पिछले कुछ सालों में फर्क जरूर पड़ा है।

हर साल नूंह में होता है होली मिलन समारोह :

नूंह में कमोबेश हर वर्ष किसी न किसी कस्बे में होली मिलन समारोह होता है। जिसमें दोनों समुदाय के लोग हिस्सा लेते हैं और इस दौरान फूलों व गुलाल की होली खेली जाती है। इतना ही नहीं एक-दूसरे समुदाय के नेता भी इस मिलन समारोह में भाग लेते हैं।
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बढ़ती है गुजिया की मांग :

मेवात में होली के पर्व पर गुजिया की मांग बहुत अधिक होती है। यहां मुख्य तौर पर फिरोजपुर झिरका से देसी घी की गुजियां मंगाई जाती हैं और एक-दूसरे को बांटकर मुंह मीठा कराया जाता है। मेवात की इन गुजियों की मिठास एनसीआर से लेकर चंडीगढ़ तक है।



फोटो - होलिका पूजन करती महिलाएं।

- एक दूसरे के साथ होली खेलते युवा।
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