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Gurugram News: आईसीडीपी भ्रष्टाचार के मामले में डिप्टी चीफ ऑडिटर और विकास अधिकारी गिरफ्तार

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एसीबी कर रही मामले की जांच, अभी अन्य कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
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संवाद न्यूज एजेंसी

रेवाड़ी। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने एक डिप्टी चीफ ऑडिटर योगिंद्र अग्रवाल और विकास अधिकारी नितिन शर्मा को गिरफ्तार किया है, जबकि इस मामले में एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) रेवाड़ी की पूर्व महाप्रबंधक अन्नू कौशिक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुग्राम के एसीबी पुलिस थाने में दर्ज सरकारी धन के गबन के दो आपराधिक मामलों में उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद गिरफ्तारी की गई हैं। दो मामलों में जांच से खुलासा हुआ कि इन दोनों ने अन्य आरोपियों के साथ आईसीडीपी रेवाड़ी के सरकारी खाते से लगभग 88 लाख रुपये की राशि का गबन किया। इसके अलावा उन्होंने मोहाली में अपने नाम से दो आवासीय फ्लैट लेने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया। भुगतान आईसीडीपी खाते से बिल्डर के खाते में चेक द्वारा किया गया। प्रवक्ता ने बताया कि अतिरिक्त लेनदेन को उजागर करने के लिए आगे की जांच जारी है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और एसीबी की टीम मामले में और अधिक जानकारी हासिल करने के लिए सुराग लगा रही है। दोनों आरोपियों को रेवाड़ी स्थित कोर्ट में पेश किया जाएगा। सहकारिता विभाग से संबंधित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आइसीडीपी) विंग में एक दो नहीं बल्कि कई करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ है।
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22 करोड़ रुपये आए थे जिले में किसानों के कल्याण के लिए

एकीकृत सहकारी विकास परियोजना विभाग सहकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इस विभाग के द्वारा चयनित जिलों में कृषि, कृषि आधारित उद्योगों, कुटीर और घरेलू उद्योगों और मत्स्य, डेयरी और पशुधन, कृषि-संबंधित क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। मुख्य तौर पर यह विंग केंद्र सरकार की तरफ से आने वाली ग्रांट से किसानों के हितों में विभिन्न योजनाओं के लिए कार्य करती है। पैक्स सोसाइटियों में खाद्य के लिए गोदाम बनाना भी इसी विंग का काम है। वर्ष 2018 से 2022 तक आइसीडीपी विंग के पास केंद्र सरकार से रेवाड़ी जिले के लिए 22 करोड़ रुपये की ग्रांट आई थी। अन्नू कौशिश जो कि अंबाला में सहकारिता विभाग में सहायक रजिस्ट्रार के पद पर उस समय तैनात थीं, उनको रेवाड़ी जिले में आइसीडीपी विंग का महाप्रबंधक बना दिया गया था।
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