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Gurugram News: अरावली जंगल सफारी परियोजना रद्द करने की मांग, भेजा ज्ञापन

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वन और वन्य जीवों से जुड़े अधिनियमों का उल्लंघन और आर्थिक कमजोर लोगों के विस्थापन का खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। राष्ट्रीय जलवायु और पर्यावरणीय न्याय मंच ने वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर गुरुग्राम और नूंह में 10 हजार एकड़ में प्रस्तावित अरावली जंगल सफारी परियोजना को रद्द करने की मांग की है। संगठन ने ज्ञापन में कहा है कि पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएपीएल), 1900 के तहत अधिसूचित क्षेत्र और अरावली प्लांटेशन प्रोजेक्ट में वनरोपित भूमि शामिल है। जंगल सफारी परियोजना वाणिज्यिक पर्यटन उद्यम है, जिसके क्षेत्र की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों पर गंभीर और नकारात्मक परिणाम होंगे।
पर्यावरण शोधकर्ता और वकील मीनाक्षी कपूर के मुताबिक यह परियोजना उन स्थानीय समुदायों की आजीविका और अधिकारों के लिए खतरा है जो चारे, ईंधन की लकड़ी और अन्य संसाधनों के लिए अरावली के जंगलों पर निर्भर हैं। प्रतिपूरक वनरोपण के लिए 24,353 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित वन घोषित करने के बाद, हरियाणा सरकार ने 30 वर्षों के लिए भूमि पर सभी सामुदायिक और व्यक्तिगत अधिकारों को निलंबित कर दिया।
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वन्य जीवों के लिए विनाशकारी
बाघ, शेर और चीते जैसी विदेशी, आकर्षक प्रजातियों को बाड़ों में लाने की योजना पर विवाद है। संरक्षण विशेषज्ञों का तर्क है कि 10,000 एकड़ के जंगल के एक हिस्से पर बाड़ लगाना विनाशकारी होगा। इससे हरियाणा में वन्यजीव गलियारा खंडित हो जाएगा, जो मंगर बानी और असोला अभयारण्यों से जुड़ता है और जिसका उपयोग तेंदुए, धारीदार लकड़बग्घे, सांभर हिरण और शहद बिज्जू जैसी देशी प्रजातियां करती हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
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