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नागरिक अस्पताल में बढ़ी फिजियोथेरेपी की मांग : 4 वर्षों में 30% ज्यादा पहुंचे मरीज

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विश्व फिजियोथेरेपी दिवस
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बदलती जीवनशैली और फिजियोथेरेपी का बढ़ता महत्व: हर आयु वर्ग के लोग ले रहे थेरेपी का सहारा

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नागरिक अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में मरीजों की संख्या में पिछले चार वर्षों में करीब 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्तमान में यहां रोजाना 40 से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। यह वृद्धि हर साल 8 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के महत्व को दर्शाती है।
बदलती जीवनशैली और खानपान के कारण लोगों में गर्दन, पीठ दर्द, खेलों से जुड़ी चोटें और जोड़ों की समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत पॉश्चर इन समस्याओं के प्रमुख कारण हैं। अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों में गर्दन और पीठ दर्द, जोड़ों की परेशानी तथा मांसपेशियों से संबंधित समस्या के मामले प्रमुख हैं। डीईआईसी (जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र) बच्चों को भी फिजियोथेरेपी सुविधा दे रहा है। यहां रोजाना करीब 15 से 20 बच्चे फिजियोथेरेपी के लिए आते हैं, जिनकी उम्र 0 से 18 साल है। अभिभावक बच्चों को चलने-फिरने में देरी, मांसपेशियों की कमजोरी और शारीरिक विकास से जुड़ी समस्याओं के कारण लाते हैं।
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फिजियोथेरेपी का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में शारीरिक विकास संबंधी समस्या दिखने पर समय रहते सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती स्तर पर फिजिकल थेरेपी से बच्चों की शारीरिक क्षमता और रोजमर्रा की गतिविधियों में सुधार होता है। नियमित व्यायाम, सही पॉश्चर और समय पर फिजियोथेरेपी कई समस्याओं को नियंत्रित कर सकती है। चोट के बाद रिकवरी, सर्जरी के बाद पुनर्वास और स्ट्रोक के बाद शारीरिक क्षमता में सुधार में इसकी भूमिका है। बुजुर्गों में संतुलन बेहतर करने में भी फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण है।
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स्वास्थ्य केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि सही देखभाल, व्यायाम से भी बेहतर बनाया जा सकता है। फिजिकल थेरेपी शरीर को मजबूत बनाने, दर्द कम करने और रोजमर्रा की गतिविधियों को आसान बनाने का प्रभावी माध्यम है। खेल चोट, सर्जरी के बाद रिकवरी या बुजुर्गों और बच्चों में चलने-फिरने की परेशानी, हर स्थिति में फिजियोथेरेपी उपयोगी हो सकती है। जरूरत पड़ने पर लोगों को फिजियोथेरेपी अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए।
-डॉ. संजीत, फिजियोथेरेपिस्ट, नागरिक अस्पताल, सेक्टर 10
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