गुरुग्राम । जिला प्रशासन और गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलेपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) के बाद अब नगर निगम ने भी बरसात के समय में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कवायद शुरू की है। शुक्रवार को नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त जयदीप कुमार ने इसके लिए इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारियों के साथ बैठक की। सेक्टर-42 स्थित नगर निगम कार्यालय में एक बैठक में उन्होंने सहायक अभियंताओं को निर्देश दिए कि जलभराव की संभावित जगहों पर पर्याप्त मशीनरी रखी जाए। वहां पर पंप और मैन पावर का समय पर प्रबंध सुनिश्चित किया जाए।
मानसून से पहले ही विभिन्न नालों की, ड्रेनेज सिस्टम की और सीवरेज लाइनों की सफाई कर ली जाए। इससे पहले जीएमडीए ने शहर में 30 ऐसे स्थान तलाशे थे, जहां पर सबसे अधिक जलभराव होता है। शीतला माता मंदिर रोड पर 10 में से 7 गलियां चिन्हित की गई थीं, जहां पर सबसे ज्यादा जलभराव की समस्या गंभीर है। ऐसी गलियों में पंपिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। जलभराव से निपटने की दिशा में ही उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने लगातार दो दिन दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण किया था।
मकानों के आगे बने रैंप जलभराव के लिए जिम्मेदार
शहर में जलभराव की समस्या के लिए भवन स्वामियों द्वारा अपने मकान के आगे बनवाए गए रैंप भी जिम्मेदार हैं। इन रैंप के चलते भूमिगत नालों में पानी पहुंचाने के लिए लगाई गई जालियां भी ब्लॉक हो गई हैं जिसके चलते सड़कों पर पानी भरा रहता है।