इंजीनियरिंग उत्पादों, ऑटो पार्ट्स, कपड़ा और फुटवियर कारोबार के लिए खुलेंगे नए अवसर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार से लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार नए अवसर लेकर आया है। समझौते के तहत भारतीय सामान की 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त होने से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर और इंजीनियरिंग उत्पादों सहित करीब 8,000 श्रेणियों के सामान को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसका फायदा गुरुग्राम और मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली उन कंपनियों को मिलेगा, जो ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और इंजीनियरिंग उत्पादों का विदेशों में निर्यात करती हैं।
भारत से न्यूजीलैंड को सालाना करीब 140.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,180 करोड़ रुपये के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात होता है। इसमें गुरुग्राम-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों की 20 प्रतिशत तक की भागीदारी है। टैरिफ समाप्त होने से इन कंपनियों को न्यूजीलैंड के आयातकों के सामने अपने उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पेश करने का अवसर मिलेगा।
गुरुग्राम-मानेसर क्षेत्र में ऑटो पार्ट्स, धातु के पुर्जे, मशीनरी और अन्य इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए यह समझौता कारोबार बढ़ाने का जरिया बन सकता है। यदि विदेशी खरीदारों की ओर से मांग बढ़ती है, तो कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी रहेगी। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां न्यूजीलैंड में कितने नए ग्राहक जोड़ पाती हैं और वहां उनके उत्पादों की मांग कैसी रहती है।
समझौते का लाभ केवल बड़ी निर्यातक कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता। गुरुग्राम और मानेसर में बड़ी कंपनियों को कलपुर्जे और अन्य सामान उपलब्ध कराने वाले छोटे एवं मध्यम उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। यदि निर्यात के ऑर्डर बढ़ते हैं, तो आपूर्ति शृंखला से जुड़ी स्थानीय इकाइयों की कारोबारी गतिविधियों में तेजी आ सकती है।
गुरुग्राम-मानेसर की कंपनियां न्यूजीलैंड के आयातकों से नए कारोबारी संपर्क स्थापित कर सकती हैं।
- अनिल शर्मा, अद्योगपति
टैरिफ में राहत मिलने से विदेशी बाजार में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की पहुंच बढ़ सकती है।
- संजय आहूजा, इंजीनियरिंग उत्पाद निर्माता
न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर उत्पादों की मांग बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
- रमेश कालरा, कपड़ा एवं फुटवियर कारोबारी
निर्यात बढ़ने पर बड़ी कंपनियों के साथ काम करने वाली छोटी औद्योगिक इकाइयों को भी लाभ मिल सकता है।
- मुकेश राज, कारोबारी