संयुक्त निगमायुक्त और एएसआई को कारण बताओ नोटिस, सफाई कंपनी को एक्सटेंशन देने व काम का बिल मुख्यालय भेजने पर चल रही जांच
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। मानेसर नगर निगम में सफाई करने वाली कंपनी के विवादित मामले मेंं नगर निगम आयुक्त के साथ अन्य लोगों पर गाज गिर सकती है। सफाई करने वाली कंपनी को चार माह तक एक्सटेंशन देने व काम का बिल मुख्यालय भेजने के लिए जिम्मेवार लोगों की जांच चल रही है। इस मामले में मुख्यालय से संयुक्त निगमायुक्त और एसएसआई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मानेसर नगर निगम की ओर से दो साल के लिए अकांक्षा इंटर प्राइजेज के नाम से टेंडर आवंटित किया गया था। यह टेंडर 20 फरवरी को पूरा हुआ। मानक के हिसाब से नगर निगम मानेसर को इस टेंडर के पूरे होने से तीन माह पहले एक टेंडर किया जाना चाहिए था, जो इसके पूरा होने के बाद अपना काम करती मगर ऐसा नहीं हुआ। निगम के अधिकारियों की ओर से मिलीभगत करके उसी कंपनी को आगे की जिम्मेदारी दे दी। चार माह के एक्स्टेंशन अप्रूवल, जिसका बिल लगभग 18 करोड़ बनता है उसे मुख्यालय भेजा गया।
इसी मामले की लापरवाही के चलते निगमायुक्त और उनके पति अतिरिक्त उपायुक्त का तबादला किया गया। इस मामले में निगम में तैनात इंजीनियरिंग विंग से लेकर अन्य लोगों की भूमिका की जांच चल रही है।
निगम के सफाई मामले में कोई बोलने को तैयार नहीं
मानेसर नगर निगम की ओर से हुए गोलमाल के मामले में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि कंपनी के तार करनाल जिले से जुड़े हुए प्रदेश के रसूखदार नेता का कंपनी संचालक पर हाथ है। इसके हस्तक्षेप से दो आईएएस अधिकारियों का तबादला हुआ है। मामले की जांच चल रही है। इसमें अन्य पर गाज गिर सकती है।
सफाई कर्मियों को नहीं मिला है वेतन कर रहें प्रदर्शन
नगर निगम मानेसर में काम करने वाले सफाई कर्मियों को तीन से चार माह का वेतन नहीं मिला है। उनकी ओर से प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं । नगर निगम के अधिकारियों की ओर से उन्हें जल्द वेतन मिलने का भरोसा भी दिया जा रहा है। नगर निगम मानेसर में कांग्रेस से मेयर का चुनाव लड़ने वाले नीरज यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन भी किया था।