आस्था के पर्व छठ में दिखा गंगा-जमुनी तहजीब का रंग, मुस्लिम-सिख भी दे रहे योदगान
36 घंटे का उपवास रखेंगे पुरुष
पूनम
गुरुग्राम। प्रकृति के प्रत्यक्ष देव सूर्य की उपासना का महापर्व छठ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व वर्ग, जाति व लिंग भेद से परे है। गुरुग्राम में भी छठ पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस महापर्व में हर वर्ग और संप्रदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग भी घाटों को सजाने में जुटे हैं। इस अवसर पर पुरुष भी 36 घंटे का उपवास रखेंगे। यह पर्व आस्था और एकता का अनूठा संगम बन गया है।
प्रकृति को नमन करने का है पर्व
मैं मूलत: बिहार के सुपौल जिले का रहने वाला हूं। पांच वक्त का नमाजी हूं। बचपन से ही गांव में छठ के आयोजन में भागीदार होता रहा हूं। चाहे घाट की व्यवस्था हो या व्रतियों की सहायता या फिर अर्घ्य के लिए दूध की व्यवस्था, हम पड़ोस के ब्राह्मण परिवारों के साथ छठ पर्व की कई जिम्मेदारी निभाते थे। गुरुग्राम में आया तो यहां छठ पर पूरे समय मौजूद रहकर सूर्योपासना के इस महापर्व में सेवाएं देता रहा हूं। - हाजी शमशुल, सचिव, मिथिलांचल जनकल्याण समिति
मैं मूलत: झारखंड का हूं। हमलोग वहां जरूरतमंदों के सूप और पूजन सामग्री, व्रतियों के लिए अर्घ्य के दूध और सुबह की चाय की व्यवस्था करते रहे हैं। हम परिवार सहित छठ घाट पर व्रतियों को अर्घ्य दिलाने जाते रहे हैं। यहां आकर सोसाइटी में भी छठ पूजा के आयोजक हैं। यह ऐसा पर्व है, जिसमें प्रकृति को नमन करते हैं। - राज किरण सिंह, मैपस्को माउंटविले, सेक्टर-79
मैं कन्हई में हर साल घाट निर्माण और पूजा के आयोजन में अपनी भागीदारी निभाता रहा हूं। हमारे यहां इस पर्व के हर कार्य को व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण से करता है। मैं बिहार के सुपौल का रहने वाला हूं। हमारे सामाजिक परिवेश छठ पूजा पर सेवा की भावना घुली मिली है। - मो. नसीर , सेक्टर-45 कन्हई घाट
पहिले पहिल हम कईनी छठी मइया व्रत तोहार...
पिछले साल तक मेरी सास यह पर्व कर रही थीं। इस साल वे अस्पताल में हैं, इसलिए मुझे व्रत की जिम्मेदारी पान सुपानी देकर सौंप दिया है। मैं एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल हूं। आस्था के इस महापर्व में मेरी बहुत आस्था है। - तेजस्विनी, विपुल लावण्या, सेक्टर 81
मेरे पति रंजीत कुमार साह पिछले 16 वर्षों से छठ कर रहे थे। इस साल मैं उनका साथ दे रही हूं। पहली बार मैं छठ का व्रत कर रही हूं। हमलोग मूलत: बिहार के बेगुसराय जिले से हैं। वहां की सारी परंपराएं यहां निभा रही हूं। - बबिता देवी, सेक्टर 45 कन्हई
मैं पहली बार छठ का व्रत कर रहा हूं। जितनी देर लोग अर्घ्य देंगे में जल में हाथ खड़ा रहूंगा। व्रत का यह एक अलग रूप है। गुरुग्राम में छठ की तैयारियों में भी पूरा योगदान देता रहा हूं। - रॉबिन यादव, सेक्टर-39