गुरुग्राम। चार दिनों तक चलने वाला भगवान सूर्य की उपासना का छठ पर्व सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। छठ पूजा पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। सोमवार को गुरुग्राम क्षेत्र में सूर्योदय 6.39 बजे और सूर्यास्त 5.29 बजे हुआ। नहाय-खाय कार्तिक माह की शुक्ल चतुर्थी से छठ पूजा प्रारंभ हुई। व्रती महिला-पुरुषों ने घरों की साफ-सफाई की और स्नान करके व्रत रखा। व्रती इस दिन एक ही समय भोजन करते हैं। ऐसे में व्रत के पहले दिन सायं के समय चने की दाल, चावल एवं लौकी की सब्जी सहित अन्य शाकाहारी भोजन बनाया गया।
सोमवार को नहाय-खाय से छठ पूर्व की शुरुआत हुई, इसके उपरांत मंगलवार को खरना, बुधवार को अस्ताचलगामी और बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होगा। जिले में काफी संख्या में बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश में प्रमुखता से मनाया जाता है लेकिन देश के सभी राज्यों में इन तीनों राज्यों के लोग नौकरी एवं रोजगार के कारण फैले हुए हैं, ऐसे में छठ पूजा पर्व सभी राज्यों में यह लोग मनाते हैं। गुरुग्राम शहर के साथ ही कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर कृत्रिम तालाब बनाए जा रहे हैं। वहीं मंडियों और बाजारों में छठ पूजा पर्व को लेकर सोमवार को लोगों ने सोमवार को भी कोसी, टोकरी, पीतल या बांस का सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, फल सहित अर्चना के लिहाज से हर छोटे-बड़े सामान की खरीदारी की।
आज खरना किया जाएगा
सोमवार को नहाय-खाय के साथ छठ पूजा पर्व की शुरुआत होने के उपरांत अब तीन दिन ओर कार्यक्रम आयोजित होंगे। छठ पूजा के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी में मंगलवार को खरना किया जाएगा। इस दिन परंपरानुसार गुड़ डालकर खीर बनाई जाती है और प्रसाद के रूप में उसी को ग्रहण किया जाता है। इस दिन भी व्रती केवल एक ही समय भोजन शाम को करते हैं और भोजन बिना नमक का बनाया जाता है। इस दिन घर में पान के पत्ते और सुपारी रखकर सूर्यदेव की स्थापना की जाती है। शाम के समय रोटी और खीर का प्रसाद लिया जाता है। इसके बाद छठ का निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाता है। मंगलवार को गुरुग्राम क्षेत्र में सूर्योदय 6.40 बजे और सूर्यास्त 5.29 बजे होगा। मुख्य छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी बुधवार को होगी। इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। सूप या बांस की टोकरी में नई फसल, सब्जियां, अदरक, नीबू आदि सजाए जाते हैं। शाम के समय नदी या तालाब में कमर तक पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन गुरुग्राम क्षेत्र में सूर्योदय 6.41 बजे और सूर्यास्त 5.28 बजे होगा। वहीं बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य कार्तिक शुक्ल सप्तमी को छठ पूजा का समापन होगा। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और पूजा के बाद प्रसाद बांटकर पर्व का समापन किया जाएगा।