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Gurugram News: हौसलों की नजर से अंधेरे को चुनौती देकर जीती रोशनी

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जिले के नेत्रहीन जूडो खिलाड़ियों ने 19 पदक जीतकर रचा इतिहास
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शिवम राजपूत
गुरुग्राम। आंखों से भले ही दुनिया न दिखाई देती हो लेकिन हौसलों की नजर इतनी तेज है कि हर चुनौती फीकी पड़ जाए। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिले के नेत्रहीन खिलाड़ियों ने। राजस्थान के श्रीगंगानगर में 19 से 22 दिसंबर तक आयोजित राष्ट्रीय पैरा एवं ब्लाइंड जूडो प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 पदक जीतकर पूरे जिले का नाम रोशन किया।
राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में जिले के नेत्रहीन खिलाड़ियों ने अलग-अलग भार वर्गों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। पदक जीतकर लौटे खिलाड़ियों ने बताया कि रोजाना कठिन अभ्यास, कोच का मार्गदर्शन और परिवार का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर मन में जीत का संकल्प हो तो शारीरिक सीमाएं उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकतीं।
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प्रशिक्षक कृतिका ने खिलाड़ियों की उपलब्धि पर कहा कि इन बच्चों ने साबित कर दिया है कि जज्बा हो तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन और मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।
वर्जन
मैच आसान नहीं था, लेकिन मैट पर उतरते वक्त मैंने सिर्फ अपने प्रशिक्षण पर भरोसा किया। यह कांस्य पदक मेरे कोच और परिवार की मेहनत का नतीजा है। - फैज हैदर,कांस्य पदक विजेता

नेत्रहीन होने की वजह से चुनौतियां ज्यादा होती हैं लेकिन जूडो ने मुझे आत्मविश्वास दिया। इस पदक ने मुझे आगे और बेहतर करने की प्रेरणा दी है। -नितिन, रजत पदक विजेता
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अनुभव ने मुझे मैच में संयम रखना सिखाया। यह दोनों पदक मेरे लिए बहुत खास हैं। मेरा सपना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करूं। -दीपक कुमार, सीनियर व जूनियर दोनों वर्ग में पदक विजेता

हर मुकाबले में दबाव होता है लेकिन मैट पर उतरते ही सब भूल जाता हूं। यह जीत मेरे आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी। -जयदेव, रजत पदक विजेता

यह पदक मेरे संघर्ष की पहचान है। मैं चाहता हूं कि समाज नेत्रहीन खिलाड़ियों को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत माने। -पंकज, रजत पदक विजेता

जूडो ने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया। यह कांस्य पदक हर उस लड़की के लिए है जो चुनौतियों से डरती हैं। - करिश्मा, महिला वर्ग की पदक विजेता
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