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CBI Raid: बिहार के बाद गुरुग्राम में सीबीआई की छापेमारी, तेजस्वी यादव के मॉल पर की कार्रवाई

Wed, 24 Aug 2022 12:24 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम

सार

बिहार के बाद छापेमारी की आंच गुरुग्राम तक पहुंच गई। सीबीआई ने लालू यादव के बेटे और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के मॉल पर छापेमारी की। 
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इसी निर्माणाधीन इमारत में सीबीआई की टीम ने की छापेमारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में अलग-अलग छापेमारी के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुग्राम के एक म\ल पर छापेमारी की है। सीबीआई ने ये छापेमारी गुरुग्राम स्थित अर्बन क्यूब्स मॉल में की है। बताया जा रहा है कि यह मॉल लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव और उनके करीबी का है। सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन के मामले में यह कार्रवाई की है। 

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जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम के सेक्टर-71 स्थित अर्बन क्यूब्स मॉल में भी सीबीआई की टीम पहुंची। मॉल अभी निर्माणाधीन है। टीम के बुधवार सुबह 10 बजे के आसपास पहुंचने की प्राथमिक सूचना है। बताया जा रहा है कि मॉल में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की हिस्सेदारी है। अर्बन क्यूब सेक्टर-71 मॉल का निर्माण व्हाइट लैंड कार्पोरेशन लिमिटेड के द्वारा किया जा रहा है।

बिहार में राजद के चार बड़े नेताओं के घर की छापेमारी
इससे पहले सीबीआई ने राजद के चार बड़े नेताओं के घर पर सीबीआई ने छापेमारी की है। जानकारी के मुताबिक, राजद सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद के अलावा एमएलसी सुनील सिंह और पूर्व एमएलसी सुबोध राय के आवास पर सीबीआई ने नौकरी घोटाले में कथित जमीन को लेकर छापेमारी की है।
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इसस मामले में सीबीआई ने तीसरी बार बिहार में छापेमारी की है। इससे पहले राजद के पूर्व विधायक और लालू यादव के ओएसडी भोला यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उनके कई ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी। वहीं सीबीआई के छापे पर एमएलसी सुनील सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाया है। उन्होंने इस छापे को राजनीति से प्रेरित बताया। कहा, यह जानबूझकर किया जा रहा है। इसका कोई मतलब नहीं है। वे यह सोचकर ऐसा कर रहे हैं कि डर के मारे विधायक उनके पक्ष में आएंगे।

नौकरी देने के बदले जमीन लेने का आरोप
दरअसल, ये मामला साल 2004-2009 के रेलवे भर्ती घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि लालू यादव जब रेल मंत्री थे तब उस समय नौकरी के बदले जमीन देने के लिए कहा जाता था। चूंकि, पैसे लेने में रिस्क था इसलिए नौकरी के बदले जमीन ही ली जाती थी। वहीं इस तरह के अवैध काम को अंजाम देने के लिए लालू के उस समय के OSD भोला यादव को ही जिम्मेदारी दी गई थी।

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