केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
- फोटो : ANI
आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में देश के किसी भी कोने में असहमति न रहे, इसलिए कृषि कानूनों को वापस लिया गया है। ये बातें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को कही। वह भाजपा किसान मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए सेक्टर-44 स्थित अपैरल हाउस पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन का आगामी चुनावों पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस ले लिया गया है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्राकृतिक कृषि पद्धति व किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को गिनाया। उन्होंने कहा कि आगामी समय में किसान मोर्चा, भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका का निर्वाह करे, इस पर चर्चा हुई है। किसान आंदोलन व कृषि कानूनों के चलते चुनावों में होने वाले संभावित नुकसान के मुद्दे पर कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि कानून वापस हो गए हैं और पूरा देश कानूनों के साथ खड़ा था।
पुराने संकल्पों को पूरा कर नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ेंगे
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि सुधार कानून किसानों की भलाई के लिए लाए गए थे। देश के बहुत छोटे हिस्से में इसका विरोध था। विरोध के बहुत से कारण भी थे, वह भी स्पष्ट हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह वर्ष देश के आजादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है और यह पुराने संकल्पों को पूरा करने व नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ने का अवसर भी है। ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में कोई भी असहमति देश के किसी कोने में पड़ी रहे। यह प्रधानमंत्री को उचित नहीं लगा और इसलिए उन्होंने ऐतिहासिक बड़प्पन का परिचय देते हुए कानूनों को वापस ले लिया।
चल रही विजय यात्रा, जीत सुनिश्चित
कृषि आंदोलन में किसान नेताओं के अलग-अलग पार्टी बनाने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भाजपा की विजय यात्रा चल रही है और आने वाले समय में चुनावी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कालखंड में कृषि के क्षेत्र में अनेक कार्य हुए हैं। चाहे डेढ़ गुना एमएसपी हो या फिर किसानों को 16 लाख करोड़ रुपये का फसल ऋण देने का मामला हो, ऐसे अनेक निर्णय लिए गए हैं। भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति खेती को बल प्रदान करने के लिए देश के किसानों से आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से साढ़े 11 हजार किसानों को 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपये उनके खातों में भेजने का काम किया जा रहा है।