- नगर निकायों में सदन चलाने की पद्धति कैसे बने आदर्श, लोस अध्यक्ष ने बताए गुर
मोहित धुपड़
गुरुग्राम। नगर निकायों में महीनों सदन की बैठकें नहीं होती। साल में एक बार बजट बैठक होती है और वे भी आधे घंटे में निपटा दी जाती हैं। उसमें भी कई बार हंगामे हो जाते हैं और स्थगित होते-होते सभी एजेंडे पास कर दिए जाते हैं। इन उदाहरणों के साथ नगरीय सरकारों यानी नगर निकायों में सदनों की ऐसी कार्यप्रणाली पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने चिंता व्यक्त की। बृहस्पतिवार को लोस अध्यक्ष बिरला गुरुग्राम के मानेसर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए नगर निकायों के अध्यक्षों, आयुक्तों व अन्य प्रतिनिधियों से रूबरू थे।
इस दौरान जहां उन्होंने निकाय अध्यक्षों को सरदार वल्लभ भाई पटेल का उदाहरण देकर खुद में कुशल नेतृत्व विकसित करने का मंत्र दिया, वहीं प्रतिनिधियों को सदन चलाने की नई परंपरा शुरू करने के तरीके भी बताए। कई बिंदुओं पर उन्होंने चेताया भी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले सरदार वल्लभ भाई पटेल अहमदाबाद म्यूनिसिपल काउंसिल के चेयरमैन थे। वहीं से उनमें देश का नेतृत्व करने की क्षमता पैदा हुई। लिहाजा आज के नेताओं में यह क्षमता कैसे पैदा हो सकती है, बिरला ने विस्तार से बताया। बिरला ने नगरीय सरकारों के बजट तैयार करने के तरीका का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान जनता, पार्षदों, विशेषज्ञों व समाजसेवियों से विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। शहर की सबसे गंभीर समस्याएं क्या-क्या हैं, बजट में उन पर विशेष फोकस होना चाहिए, उसके बाद जिन मदों में बजट तैयार किया गया है, उनका कार्यान्वयन ठीक से हुआ है या नहीं, इसकी व्यापक निगरानी होनी चाहिए।
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महिलाओं का नेतृत्व बढ़ाने पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने नगरीय सरकारों में भी महिलाओं का नेतृत्व बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों की विधानसभा में महिलाओं को 33 व कई 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जा रहा है। उनके नेतृत्व में बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं का नेतृत्व हमेशा संवेदनशील होता है। संवेदना उनके कार्य, व्यवहार, आचरण व जीवन में होती है। इसलिए निकायों में भी महिला नेतृत्व को बढ़ाना चाहिए।