गुरुग्राम। रिश्वत लेते पकड़े गए नगर निगम के जेई को एक महीने की अंतरिम जमानत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया। सेशन कोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में भी जमानत याचिका लगाई हुई है, जो पेंडिंग है। ऐसे में दूसरी याचिका संभव नहीं है। उसने मां की बीमारी का हवाला देकर जमानत मांगी थी।
विजिलेंस टीम ने 23 जुलाई 2015 को छापा मारकर नगर निगम के तोड़फोड़ दस्ते में तैनात जेई दिलबाग सिंह को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जेई पर आरोप था कि अवैध निर्माण न तोड़ने के बदले उसने रिश्वत ली। फिलहाल जेई हिसार कृषि विभाग में तैनात था। 25 अप्रैल 2022 से वह न्यायिक हिरासत में है। 20 मई को उसकी पहली जमानत याचिका अतिरिक्त सेशन कोर्ट से खारिज हुई। इसके बाद एक जून को उसने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की, जिस पर अब 6 जुलाई को सुनवाई होनी है। जेई की ओर से अब एक महीने की अंतरिम जमानत के लिए सेशन कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें आरोपी के वकील का कहना है कि उसकी 81 साल की मां अस्पताल में गंभीर हालत में दाखिल है। उनकी देखभाल के लिए एक महीने की अंतरिम जमानत दी जाए। वहीं सब तथ्यों को देखने के बाद सेशन कोर्ट ने कहा कि ऐसा कुछ साफ नहीं है कि आरोपी का अपनी मां के पास अस्पताल में रहना जरूरी हो। ऐसे में अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती। ये कहते हुए कोर्ट ने अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।