गुरुग्राम। 2009 के मामले में आरोपी को भगोड़ा घोषित कराने के बाद पुलिस उसे चार साल तक अलग-अलग मामले में गिरफ्तार करती रही। अब आरोपी ने 2009 के आर्म्स एक्ट के मामले में जमानत की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की। मामले में अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश यशविंद्र पाल सिंह की अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी है। आरोपी के खिलाफ 2009 में आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
नूंह के फिरोजपुर झिरका के महू गांव निवासी अरशद ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि तीन अक्तूबर 2009 को उसके खिलाफ दर्ज हुए आर्म्स एक्ट के मामले में वह 23 जुलाई से जेल में है। उस समय उसकी उम्र 17 साल थी। अभी मामले की सुनवाई में काफी समय लगेगा। अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी को छह अगस्त 2014 को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था। वह दोबारा से भाग सकता है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दंडनीय अपराध का आरोप है। यह स्वीकार किया जाता है कि बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। याचिकाकर्ता के विरुद्ध सभी गवाह पुलिस अधिकारी हैं। याचिकाकर्ता को कथित तौर पर 6 अगस्त 2014 को उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था, लेकिन लगभग 12 वर्षों तक पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार नहीं किया गया लेकिन 2021, 2022, 2023 और 2024 के दौरान अन्य मामलों में हिरासत में लिया गया था। अब याचिकाकर्ता इस मामले में 23 जुलाई 2026 से हिरासत में है। मुकदमे की सुनवाई शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है। याचिकाकर्ता को और अधिक समय तक हिरासत में रखने से कोई लाभ नहीं होगा।