मेयर की अध्यक्षता में हुई बैठक, नागरिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
प्रत्येक वार्ड में स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी होगी मजबूत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम के कार्यालय में बृहस्पतिवार को मेयर राजरानी मल्होत्रा की अध्यक्षता में सदन की एक विशेष बैठक हुई। बैठक में शहर के सभी वार्डों में वार्ड कमेटियों के गठन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। साथ ही वार्ड कमेटियों के बैंक खाते खोलने पर भी सहमति बनी।
बैठक में निगमायुक्त प्रदीप दहिया, अतिरिक्त निगमायुक्त अंकिता चौधरी व रविन्द्र यादव, निगम सचिव एवं संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार, चीफ इंजीनियर विजय ढाका सहित पार्षदगण उपस्थित रहे। यह निर्णय गुरुग्राम में स्थानीय स्तर पर निगम प्रशासन को अधिक प्रभावी और सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कानून के प्रावधानों के तहत होगा कार्य
वार्ड कमेटियों का गठन हरियाणा म्युनिसिपल सिटिजन्स पार्टिसिपेशन एक्ट, 2008 के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। इस अधिनियम के तहत वार्ड स्तर पर नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र सभा प्रतिनिधियों व विभिन्न वर्गों से नामित सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित करना है।
हर वार्ड में पार्षद होंगे चेयरपर्सन
संरचना के अनुसार, प्रत्येक वार्ड के निर्वाचित पार्षद को संबंधित वार्ड कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। उनके साथ समाज के विभिन्न वर्गों, महिलाओं, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है, ताकि कमेटियां समावेशी स्वरूप में कार्य कर सकें। यह संरचना अधिनियम में निर्धारित सामाजिक प्रतिनिधित्व के अनुरूप है।
वार्ड स्तर पर विकास कार्यों की होगी निगरानी
वार्ड कमेटियों की मुख्य भूमिका स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं की प्राथमिकता तय करना, सफाई व्यवस्था की निगरानी करना, स्ट्रीट लाइट, सड़क, पानी, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ीं समस्याओं की पहचान कर उन्हें निगम तक पहुंचाना होगी। कमेटियां नियमित बैठकें आयोजित कर क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा करेंगी और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान सुनिश्चित करने में सहयोग देंगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की पहल
वार्ड कमेटियां नागरिकों और नगर निगम के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेंगी। इससे विकास कार्यों की निगरानी बेहतर होगी, स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनेंगी और कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी। इस व्यवस्था से जनभागीदारी आधारित शहरी प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा और गुरुग्राम के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।