पशु पकड़ने में नगर निगम है नाकाम, टेंडर प्रक्रिया में होगा बदलाव
10 हजार पशु घूमते हैं सड़क पर
अमर उजाला ब्यूराे
गु़रुग्राम। साइबर सिटी की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने में नगर निगम नाकामयाब साबित हो रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम (एमसीजी) ने दोबारा पहल शुरू कर दी है। पिछले माह निगम ने लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किया था लेकिन किसी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अब निगम ने नियमों में बदलाव कर दोबारा आवेदन मांगे हैं। निगम की ओर से लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए भी दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शहर के मुख्य मार्गों और कॉलोनियों में घूमते ये लावारिस मवेशी यातायात में बाधा के साथ-साथ सड़क हादसों का भी प्रमुख कारण बन रहे हैं। पिछले दो वर्षों से निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकताओं तक सीमित रही है। सीमित संसाधनों के चलते अब तक केवल 700 पशुओं को ही पकड़कर गोशाला तक पहुंचाया गया है। नगर निगम की ओर से हुए एक सर्वे में चारों जोन में 10 हजार से अधिक पशु होने की संभावना है। नगर निगम के 36 वार्ड के पार्षदों की ओर से सदन में यह समस्या उठाई जा चुकी है।
चार जोन में विभाजित होगा काम
एजेंसियों की पहले की बेरुखी को देखते हुए निगम ने इस बार टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किए हैं। अब पूरे शहर के बजाय चारों जोनों में अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इस रणनीति से स्थानीय व छोटी एजेंसियों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा। निगम को उम्मीद है कि विकेंद्रीकृत ढांचे से काम की गुणवत्ता बढ़ेगी और शहर की सड़कों को जल्द ही लावारिस पशुओं से मुक्त कराया जा सकेगा। यह कदम न केवल स्वच्छ सर्वेक्षण के लिहाज से जरूरी है बल्कि नागरिक सुरक्षा और सुचारू यातायात के लिए भी अहम है।
वर्जन
लावारिस पशुओं को पकड़ने और कुत्तों के टीकाकरण दोनों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि इस बार एजेंसियां आगे आकर सहयोग करेंगी और शहर को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने के प्रयास सफल होंगे। - डॉ. प्रीतपाल संयुक्त आयुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम।