उद्यमियों ने कहा, पुराने कर्मी 35 प्रतिशत वृद्धि की कर रहे मांग
धातु, केमिकल, माल भाड़ा आदि बढ़ने से लागत बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा सरकार द्वारा पिछले दिनों न्यूनतम मजदूरी दर 4000 रुपये तक बढ़ाए जाने के बाद से छोटे उद्यमी परेशान हैं। श्रम विभाग उद्योगों पर न्यूनतम मजदूरी दर अप्रैल के महीने के वेतन के साथ उपलब्ध कराने की नोटिस चस्पा कर रहा है। विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों का कहना है कि यह वृद्धि सही है मगर जो पुराने श्रमिक हैं और उनका वेतन सरकार के न्यूनतम मजदूरी दर से ज्यादा भी है, वे अब 35 प्रतिशत वृद्धि की मांग कर रहे हैं क्योंकि न्यूनतम मजदूरी दर हर श्रमिक पर लागू है। ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए पुर्जे बनाने वाले उद्यमियों का कहना है कि जिन्हें वे सामान बेचते हैं, वे कीमतें बढ़ाने को राजी नहीं है। धातुओं की कीमतों से माल भाड़ा तक सब बढ़ा हुआ है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयां बंद हो सकती हैं।
वर्जन
हमारे उद्योग के लिए जरूरी केमिकल, मेटल्स सभी महंगे हो गए हैं। हम लोग वैसे भी श्रमिकों के वेतन 10-10 प्रतिशत बढ़ाते रहते हैं। केमिकल से लेकर मेटल तक की कीमतें बढ़ी हुई हैं। हमारे उत्पाद के खरीदार कीमतें नहीं बढ़ा रहे हैं। -स्नेहलता भदौरिया, उद्यमी, सेक्टर-37 पेस सिटी
इस वक्त उद्योग बहुत बुरे हालात से गुजर रहे हैं। सरकार ने तो न्यूनतम वेतन वृद्धि कर दी मगर इसे देना तो उद्यमियों को ही पड़ेगा। उद्यमी हर साल अपने श्रमिकों के वेतन बढ़ाते रहे हैं। उन्हें किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं रहता है। -राजेश गुप्ता, अध्यक्ष, मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
अब सरकार का निर्णय है तो हमें यह दर देनी ही पड़ेगी मगर मुश्किल यह है कि नए और पुराने श्रमिकों को एक स्तर का वेतन नहीं दे सकते हैं। अब पुराने श्रमिक भी 35 प्रतिशत वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में लागत बहुत बढ़ रही है। -विनोद अग्रवाल, संयुक्त सचिव मिवा
सरकार ने सामाजिक, औद्योगिक और श्रमिक हितों के विभिन्न बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की है। यह 2015 से लंबित थी। हालांकि मजूदरों की मांग 30,000 रुपये प्रति माह की थी। -विनोद गुप्ता, उपाध्यक्ष एमएसएमई चैंबर ऑफ कॉमर्स