पत्तों पर जमीं धूल के कारण ऑक्सीजन का उत्सर्जन हो रहा बाधित
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। धूल और रेत के कण लोगों को तो बीमार कर ही रहे हैं, अब इनके साथ ही यह पेड़ों के लिए भी संकट बन गए हैं। शहर में मौजूद
लगभग हर पेड़ की पत्ती पर धूल जमीं है। इससे पेड़ों की ऑक्सीजन छोड़ने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। गैस चैंबर बन चुके गुरुग्राम में इंसानों के साथ पेड़ भी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाता नहीं दिख रहा है। नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर गैस चैंबर में तब्दील हो गया है।
लगातार बढ़ रही आबादी और उसके लिए होने वाले निर्माण कार्यों के लिए हर साल हजारों पेड़ काट दिए जाते हैं और शेष रह गए पेड़ शोपीस का काम कर रहे हैं। यही कारण है कि शहर में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। धूल के कारण पत्तियों पर मौजूद छिद्रों से पेड़ों की संश्लेषण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है। इसके कारण पेड़ों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिलता और वह धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पेड़ों की पत्तियों पर धूल जमने से हवा में मौजूद गैसों का असंतुलन उत्पन्न हो जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव शहर पर तेजी से बढ़ेगा। फिलहाल शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार जा चुका है, जिसे बेहद खतरनाक स्तर समझा जाता है।
शहर में ग्रैप-3 के नियम लागू हैं, इसके बावजूद शहर में कई जगह निर्माण कार्य चल रहा है। इससे उठने वाली धूल पेड़ों की पत्तियों पर आकर चिपक जाती है। जिससे पेड़ हवा से कॉर्बन डाईऑक्साइड लेने और ऑक्सीजन छोड़ने का कार्य नहीं कर पाते।
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नगर निगम को तत्काल पेड़ों पर पानी की बौछार करने की आवश्यकता है, जिससे पत्तियों पर मौजूद धूल को हटाया जा सके। जिससे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। वैशाली राणा, पर्यावरणविद्