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Gurugram News: ज्ञान के मंदिर में गंदगी का भंडार

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महाविद्यालय परिसर में भरा सीवर का पानी, वन और जनस्वास्थ्य विभाग की खींचतान में पिस रहे छात्र
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प्रेमचंद पालमी
पटौदी। जटौली, हेलीमंडी के राजकीय महाविद्यालय परिसर में सीवर का पानी भरा हुआ है। खेल मैदान और कॉलेज में भरे सीवर के कारण दुर्गंध के बीच छात्र पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई सालों से भरे सीवर की समस्या के निदान के लिए सरकार ने 41 करोड़ रुपये की योजना भी मंजूर की, जिसके भी टेंडर हो गए लेकिन वन विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के आपसी विवाद के कारण काम अटक गया। इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ज्ञान के मंदिर में गंदगी के भंडार से छात्र व शिक्षक सभी परेशान हैं।



राजकीय महाविद्यालय में भरे सीवर को निकालने के लिए 41 करोड़ रुपये की योजना तैयार की जा चुकी है। इस सीवर को पाइपलाइन बिछाकर एफ्लुएंट चैनल तक ले जाने की योजना है। टेंडर पास होकर काम शुरू हुआ लेकिन वन विभाग ने अपनी भूमि में पाइप डालने की अनुमति देने से इंकार कर दिया, जिसके बाद काम बीच में ही रुक गया। अब कॉलेज के खेल मैदान और परिसर में सीवर भरा हुआ है। इससे कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी और शिक्षक दुर्गंध से बेहाल हैं।
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सेहत पर संकट



खेल मैदान तालाब का रूप ले चुका है। मच्छर, बदबू और खरपतवार से छात्रों को संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही जंगली जानवर और बंदरों का आतंक अतिरिक्त परेशानी खड़ी कर रहा है। छात्रों का कहना है कि सरकार और प्रशासन केवल कागजों में समाधान दिखाते हैं लेकिन हकीकत में वे गंदगी और बीमारियों के बीच शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। एमए की छात्रा काजल बताती हैं कि गंदे पानी के कारण पूरे परिसर में बदबू है। पढ़ाई के लिए यहां बैठना एक सजा की तरह है। वहीं, बीए प्रथम वर्ष की छात्रा नैन्सी ने कहा कि खेल मैदान दलदल में तब्दील हो चुका है, जहां खेलना तो दूर, बैठना भी संभव नहीं।



इमारत भी बदहाल

परिसर में भरे सीवर की सीलन के कारण कॉलेज भवन भी जर्जर हो रहा है। इसकी खिड़कियां टूटी पड़ी हैं और मैदान खरपतवार से भर गए हैं। स्थानीय निवासी सुरेंद्र चौहान का कहना है कि शिक्षा के मंदिर में एसटीपी का गंदा पानी भरना बेहद शर्मनाक है। अब तो हालत यह हैं कि गंदा पानी कक्षाओं तक पहुंच रहा है और विद्यार्थियों को बदबू के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। कॉलेज प्रशासन पटौदी एसडीएम, उपायुक्त को कई बार पत्र भेज चुका है लेकिन वन विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के बीच कोई समाधान नहीं निकल सका है।
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प्राचार्य ने भी जताई बेबसी



यह समस्या पिछले 5-6 वर्षों से बनी हुई है। गंदगी और बदबू के कारण छात्रों की संख्या भी दिन-प्रतिदिन घट रही है और शिक्षक व स्टाफ भी नारकीय हालात में काम करने पर विवश हैं। विधायक बिमला चौधरी इस मामले को उठा चुकी हैं लेकिन कोई समाधान नहीं मिल पाया। -डॉ. ज्योत्सना गुलाटी, कार्यवाहक प्राचार्या
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