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केवल 2 बेड के सहारे नागरिक अस्पताल का बर्न वार्ड

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केवल 2 बेड के सहारे नागरिक अस्पताल का बर्न वार्ड
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-दिवाली पर झुलसे हुए मरीजों को इलाज में हो सकती है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। दिवाली पर पटाखों से झुलसने वाले मरीजों को नागरिक अस्पताल में इलाज करवाने में परेशानी हो सकती है। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से केवल बर्न वार्ड के नाम पर दो ही बेड का इंतजाम किया गया है। ऐसे में यदि घायलों की संख्या इससे अधिक रहती है, तो उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर करने के अलावा डॉक्टरों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
जिला नागरिक अस्पताल के प्रथम तल पर करीब छह बेड का बर्न वार्ड बनाया गया था। आगजनी की घटनाओं में 40 फीसदी तक झुलसे घायलों को यहां भर्ती कर इलाज किया जाता था। अस्पताल में बढ़ती गर्भवतियों की संख्या को देखते हुए नव नियुक्त प्रधान चिकत्सा अधिकारी ने इस बर्न वार्ड को बंद कर, वहां गायनी वार्ड बना दिया, जिसमें अब गर्भवती महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। अब अस्पताल प्रबंधन ने दिवाली के मद्देनजर दो बेड का अस्थायी बर्न वार्ड बना दिया है।
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अस्थायी बर्न वार्ड में नहीं सुविधाएं
किसी भी अस्पताल में बर्न वार्ड बनाने के लिए अलग से मानक तय हैं। इसके अनुसार बर्न वार्ड पूरी तरह वातानुकूलित होना चाहिए। इसके अलावा वाइटल पैरामीटर मोनीटर्स, स्किन ग्राफ्ट मैशर, पोर्टेबल लाइट व सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण उपलब्ध होने चाहिए। इसके अलावा स्टाफ में एक सर्जन, फीजियोथैरेपिस्ट, स्टाफ नर्स, ड्रैसर व बहुउद्देश्यीय स्टाफ होने चाहिए, लेकिन अस्पताल में इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की कोई नियुक्ति नहीं है।
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बयान
पहले वाले बर्न वार्ड की जगह गायनी वार्ड बना दिया गया है। इसके स्थान पर दो बेड का अस्थायी बर्न वार्ड तैयार किया गया है। दिवाली के मद्देनजर इस वार्ड का निर्माण किया है।
-डॉ. संजय नरुला, सर्जन व बर्न वार्ड प्रमुख
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