स्वाइन फ्लू टेस्ट के लिए 4500 रुपये से अधिक वसूले तो कार्रवाई
गुरुग्राम। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सरकार द्वारा निर्धारित 4500 रुपये की दर से अधिक वसूलने वाले निजी अस्पतालों व लैब के खिलाफ कार्रवाई होगी। लैब या निजी अस्पताल को स्वाइन फ्लू के प्रत्येक मरीज का सैंपल स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है। बृहस्पतिवार को यह जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय में स्वाइन फ्लू को लेकर निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों व लैब संचालकों के साथ हुई बैठक में दी गई। वहीं विभाग की और से अस्पतालों व लैब को स्वाइन फ्लू के केवल सी श्रेणी में आने वाले मरीजों का ही टेस्ट करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. बीके राजौरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में अस्पतालों के प्रतिनिधियों को बीमारी से बचाव व उपचार की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उप-सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाटान ने बताया कि स्वाइन फ्लू को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा गया है। श्रेणी ए व बी के मरीजों को ज्यादा खतरा नहीं रहता, इसलिए अस्पतालों या लैब को उनका टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। केवल श्रेणी सी के मरीजों का ही टेस्ट करवाएं।
बाजार में उपलब्ध हैं दवाइयां
डॉ. जाटान ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीज को टैमीफ्लू दवा दी जाती है। यह बाजार में सभी दवा की दुकानों पर उपलब्ध है। यदि किसी को बाजार में यह दवा नहीं मिलती, तो वह नागरिक अस्पताल से इसे नि:शुल्क हासिल कर सकता है।
12 संदिग्ध मरीज मिले
सिविल सर्जन डॉ. बीके राजौरा ने बताया कि जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के 12 संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई है। इन मरीजों के सैंपल एनसीडीसी भेजे गए थे। जांच में एक भी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई।