गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण अब ग्रामीण क्षेत्रों में बेकाबू होने लगा है। टेस्टिंग न होने के कारण मरने वालों के बारे में यह जानकारी नहीं हो पा रही है कि किस की मौत संक्रमण से हुई है या सामान्य मौत हुई। शुक्रवार को फर्रुखनगर के हाजीपुर गांव में एक साथ 15 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसी के बाद हाजीपुर के साथ-साथ आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की टीम भी जांच के साथ-साथ व्यवस्थाओं के लिए पहुंची। वहां के नायब तहसीलदार के निर्देश पर सरपंच ने 20 बेड का आइसोलेशन सेंटर स्थापित करा दिया है, लेकिन वहां पर सुविधाएं न होने के कारण संक्रमित घरों में ही आइसोलेट हो रहे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन के तीन सिलिंडर की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया है। कई अन्य लोगों में संक्रमण के लक्षण हैं, जिन्होंने टेस्ट कराने की अनुरोध भी किया है।
फर्रुखनगर के हाजीपुर गांव के लोग पिछले महीने से बुखार, खासी और सर्दी से पीड़ित हैं। इसी तरह के लक्षण के कारण दो महिलाओं सहित तीन की मौत भी हो चुकी है। धनाबास में तो कई लोगों की मौत पिछले महीने हुई थी, इस महीने भी कई लोग खासी, जुकाम और बुखार के कारण मर चुके हैं। लेकिन यहां के लोगों का अभी तक टेस्ट नहीं हुआ है। हाजीपुर के सरपंच के अनुरोध पर संक्रमित लोगों का टेस्ट कराने के लिए विधायक ने तीन दिन पहले टीम भिजवाई थी। शुक्रवार को इनमें से 15 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
इसी के बाद शुक्रवार को नायब तहसीलदार रणसिंह गौदारा, थाना प्रभारी सुरेश फौगाट, एसईपीओ सुरजीत सिंह, सीएचसी के मुख्य चिॅकित्सक डॉ. रणविजय यादव ने दौरा करके कोरोना संक्रमितों का हालचाल पूछा। उन्हें घरों में रहने की सलाह दी। जिससे कि अन्य ग्रामीण संक्रमण की चपेट में न आ सके। इस विकास खंड में सबसे ज्यादा 20 बेड का आइसोलेशन सेंटर हाजीपुर में बनाया गया है।
14 गांवों में काफी लोगों के संक्रमित होने की आशंका
विकास खंड की 46 पंचायतों के 14 गांवों में आइसोलेशन सेंटर बनाए गए है। उनमें जमालपुर, हाजीपुर, मुबारिकपुर, पातली, अलीमुद्दीनपुर, सुल्तानपुर, जनौला, खंडवेला, फाजिलपुर बादली, धानावास, सिवाडी, खुर्रमपुर, कारौला, सैदपुर मोहम्मदपुर है। इन सभी गांवों में पिछले महीने से काफी लोग बुखार, खासी से पीड़ित हैं। इसी तरह के लक्षण वाले कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इन गांवों के काफी लोग संक्रमित भी बताए जा रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टर ही कर रहे इलाज
हाजीपुर के सरपंच धर्मपाल गुरावलिया का कहना है कि पिछले महीने से फर्रुखनगर विकास खंड के दो दर्जन गांवों में बुखार खांसी और जुकाम से काफी लोग पीड़ित हैं। जिनके इलाज के लिए गांवों में कोई टीम नहीं पहुंची है। इन गांवों में अगर झोलाछाप डाक्टर नहीं होते तो काफी लोगों की जान चली जाती। झोलाछाप डाक्टरों के इलाज से ही यहां के लोगों की जान बची है। वे ही खासी, जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीजों को कोरोना संक्रमित मानकर वही दवाइयां दे रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों की जान बच रही है। सरपंच ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि आइसोलेशन सेंटरों पर कम से कम ऑक्सीजन के तीन-तीन सिलिंडर की व्यवस्था करा दें। जिसके कि सांस लेेने में जिनको तकलीफ हो, उनको इलाज के दौरान राहत मिल सके।