प्रदेश सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई करीब 13 एकड़ जमीन पर रोक लगा देने का मामला गुड़गांव-मानेसर अर्बन कांप्लेक्स के विवाद से जुड़ा है। यह ऐसा विवाद है, जो कि करीब एक दशक से चल रहा है। गुड़गांव-मानेसर ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान-2031 को सितंबर 2012 में सहमति मिली थी। चार सितंबर को इसकी अधिसूचना जारी हुई। मास्टर प्लान-2031 गुड़गांव में 42 लाख की जनसंख्या के अनुमान के मुताबिक तैयार हुआ।
इसके मुताबिक करीब 33 हेक्टेयर भूमि का शहरीकरण होना है। इसमें करीब 16 हेक्टेयर भूमि का आवासीय कार्यों में उपयोग होगा। 1616 हेक्टेयर जमीन व्यावसायिक और 4613 हेक्टेयर जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए रखी गई है। 4420 हेक्टेयर भूमि यातायात एवं संचार और 2034 हेक्टेयर जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए रखने की योजना है। किसान अपनी जमीन को बचाने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
कई लोग इसके खिलाफ अदालतों में चले गए। सूत्रों की मानें तो यह मामला भी इसी विवाद का एक हिस्सा है। याचिकाकर्ता पवन गुप्ता ने भी हाईकोर्ट में अपनी 13.75 एकड़ जमीन का चेंज ऑफ लैंड यूज निर्देश जारी करने का आग्रह किया था। पिछली सुनवाई में कंट्री एंड टाउन प्लानिंग विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता ने कहा था कि पवन गुप्ता की जमीन उस जमीन में शामिल नहीं है, जिसके लाइसेंस जारी किए गए हैं। ऐसे में यथास्थिति बनी रहेगी।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस जमीन को सेक्शन चार के तहत अधिग्रहीत कर लिया। हाईकोर्ट ने इस निर्णय को गैर कानूनी माना, जिसके फलस्वरूप जमीन अधिग्रहण पर रोक लगा दी गई है। इसी से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई 24 फरवरी को भी होनी है।