हरियाणा सरकार अरावली और वन्य जीव संरक्षण को लेकर तमाम दावे कर रहा है, लेकिन नगर निगम ने ही तेंदुए के शिकार और मौत के लिए इंतजाम कर दिया है।
अरावली की गोद में फरीदाबाद-गुडग़ांव हाईवे पर सिल्वर ओक चौक से महज 500 मीटर की दूरी पर निगम ने वन विभाग की जमीन पर मृत पशु स्थान चिह्नित कर दिया है। जो तेंदुए और वन्य जीव के लिए खतरा बन गया है।
बता दें कि इसी सड़क पर करीब 200 मीटर दूर पर वर्ष 2015 में एक तेंदुए की गाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
दरअसल, मृत पशुओं के निपटारे के लिए नगर निगम ने अरावली की गोद में वन विभाग की भूमि पर मृत पशु स्थल घोषित किया है। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को ठेका दिया गया है। अभी यहां पर करीब 100 से अधिक पशुओं के मांस, हड्डियां और चमड़े बिखरे हैं।
मृत पशुओं की बदबू से अब यहां जंगली जानवर आकर्षित होने लगे हैं। इसके पीछे तेंदुए के शिकार के लिए पीछे आने की प्रबल संभावना है। इसका फायदा शिकारी उठाएंगे।
इस क्षेत्र से सटे ग्रामीणों का दावा है कि यहां पर बीते रविवार को सियार और लकड़बग्घा को मृत पशुओं को खाते देखा गया था। पर्यावरणविदों का कहना है कि मृत पशुओं को जंगली जानवर खाने के लिए आ रहे हैं। सियार और लकड़बग्घा का पीछा करते हुए तेंदुए आ सकते हैं।
हाल ही में फरीदाबाद-गुड़गांव हाईवे से करीब 800 मीटर दूर सिकंदरपुर के पास अलग-अलग दिन तेंदुए देखे गए थे। पिछले साल लकड़बग्घा का पीछा कर रहे 12 साल की मादा तेंदुए की गाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
लकड़बग्घा आमतौर पर मृत पशुओं का मांस खाता है। अरावली में इस तरह से मृत पशु और भी दूसरे जानवर को आकर्षित करेंगे जिनकी सड़क हादसों में मौत हो सकती है। जबकि इनका शिकार करने के लिए तेंदुए पीछे रहते हैं।
वो भी यहां पर आए जानवरों पर घात लगाने के ताक में रहेंगे। इससे उनका शिकार होने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में बदबू अभी से फैलने लगी है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। भूमि प्रदूषण और भूमिगत जल प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।-चेतन अग्रवाल, पर्यावरणविद्
वन संरक्षित क्षेत्र है यह
पर्यावरण और वन्य जीव के लिए यह संरक्षित क्षेत्र घोषित है। यहां पर कई बार तेंदुआ व अन्य वन्य जीव देखे जा चुके हैं। यहां पर दो तेंदुए की मौत हो चुकी है। मांगरबनी चौक के पास 05 मई 2015 को सड़क पार करते हुए तेंदुए की मौत हुई थी। इससे पहले एक और मौत हो चुकी है।
इस साइट का दौरा करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इस तरह की गतिविधि के लिए नगर निगम को कोई पत्र नहीं दिया गया है।-वाश्वी त्यागी, जिला वन अधिकारी
इस बारे में सोच-विचार कर अनुमति दी गई है। आला अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई थी।-टीएल सत्यप्रकाश, निगमायुक्त