एक देश...एक टैक्स...एक बाजार के तहत बेशक शुक्रवार रात 12 बजे से जीएसटी लागू हो गया है, लेकिन दिल्ली के बाजारों में इसका मिला-जुला असर देखने को मिला है। छोटे रेस्टोरेंट, सिनेमा हाल से लेकर आम दुकानों में जीएसटी के तहत कितना टैक्स लगेगा या फिर कम होगा, उसके बारे में सही से जानकारी ही नही हैं। इसके चलते पुराने दाम पर टिकट से लेकर स्टॉक की क्लीयरेंस हो रही थी। बड़े रेस्टोरेंट ने थाली के दाम पांच फीसदी तक बढ़ा दिए हैं, लेकिन मिठाई के दाम में बढ़ोतरी फिलहाल नहीं की गयी है।
वहीं, खादी ग्रामोद्योग में सबसे अधिक ग्राहकों को परेशानी समेत जेब ढीली हुई। क्योंकि खादी के कपड़ों पर पांच से 12 फीसदी तक जीएसटी लगेगा। अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा और फोटोग्राफर हिमांशु ने जीएसटी लागू होने के बाद दिल्ली के विभिन्न बाजारों का दौरा करते किया, पेश है रिपोर्ट:-
खादी ग्रामोद्योग : कनॉट प्लेस : शाम 5 बजे
- पुराने स्टॉक में रेट लिस्ट अपडेट का काम शुरू, कैश काउंटर पर दिक्कत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेशक युवाओं से खादी प्रोडेक्ट खरीदने पर जोर देते हैं, लेकिन जीएसटी का सबसे अधिक असर खादी ग्रामोद्योग की दुकानों पर देखने को मिला है। क्योंकि खादी के रनिंग मैटिरियल पर पांच फीसदी और रेडीमेट कपड़ों पर 12 फीसदी तक जीएसटी लग गया है। रेडीमेट कपड़ों पर पुराने स्टीकर को हटाकर अब नए दाम के स्टीकर चिपकाने का काम शुरू हुआ है।
इसी प्रकार खादी साबुन जो कि पहले 60 रुपये का था, वह अब 67 रुपये का हो गया है। अन्य सामान पर भी जीएसटी के चलते दाम में बदलाव होगा, जिसकी लिस्ट तैयार की जा रही थी। शनिवार को खादी भवन में सबसे अधिक ग्राहकों की भीड़ रहती है, लेकिन जीएसटी के चलते सामान बिखरा पड़ा था । इसके चलते ग्राहक आकर भी अधिक नहीं पहुंचे।
- सर्वर में नए दाम की लिस्ट अपडेड का काम शुरू
जीएसटी लागू होने के बाद शनिवार सुबह शोरूम खुलने पर सर्वर में नए दाम की लिस्ट को अपडेट करने का काम शुरू हुआ है। इसके अलावा कपड़ों से लेकर अन्य सामान पर लगे पुराने दाम के स्टिकर हटाकर नए स्टिकर लगाने का काम किया जा रहा है। क्योंकि अधिकतर सामान पर जीएसटी लगने के बाद दाम में बढ़ोतरी हुई है। सामान में नए स्टिकर लगने के चलते सामान इधर-उधर बिखरा है।
इसी के चलते ग्राहकों को थोड़ी दिक्कत हुई। सर्वर में सामान के नए दाम की लिस्ट अपडेट न होने के कारण कैश काउंटर पर भी लाइन थी। क्योंकि सारा काम मैनुअल (हाथ से तैयार बिल की पर्ची) हो रहा था।
- नरेंद्र सिंह, सीनियर इंचार्ज, खादी ग्रामोद्योग, कनॉट प्लेस