अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बुधवार को ग्रोइन हर्निया (असामान्य आकार) से पीड़ित 68 वर्षीय मरीज की लैप्रोस्कोपी तकनीक से सफल सर्जरी की गई।
एम्स में 15 चिकित्सकों के दल ने इस सर्जरी को सफल बनाया। मरीज अभी आईसीयू में भर्ती है और उसकी सेहत में सुधार हो रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि हर्निया की सर्जरी आम बात होती है लेकिन इस मरीज में हर्निया पेट के निचले हिस्से से निजी अंगों तक पहुंच गया था।
आकार काफी बड़ा हो जाने की वजह से हर्निया छोटी और बड़ी आंत के अलावा शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर रहा था। इसी वजह से सर्जरी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। इसके बावजूद चिकित्सकों ने लैप्रोस्कोपी तकनीक का सहारा लिया।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि आम तौर पर हर्निया की सर्जरी में एक जाली का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इस सर्जरी में दो जाली का इस्तेमाल किया गया।
टीम में डॉ. हेमांग भट्टाचार्य, डॉ. नलिनी कांत, डॉ. जुनैद और एनेस्थीसिया की वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. राजेश्वरी सुब्रह्मण्यम का विशेष योगदान रहा। एम्स निदेशक ने बताया कि इस सर्जरी में एनेस्थीसिया की टीम का बड़ा रोल रहा है।
दो घंटे की सर्जरी में 15 चिकित्सकों के दल ने काम किया। एम्स निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि यदि मरीज की सर्जरी में देरी होती तो उसे हृदय और सांस संबंधी परेशानी बढ़ जाती।
उन्होंने बताया कि मरीज धूम्रपान करता था इसलिए उसकी परेशानी और ज्यादा बढ़ गई थी। सही तरीके से मरीज को चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल पाई थी इस वजह से मरीज की चिकित्सीय हालात इस स्थिति में पहुंच गई थी।