ग्रेटर नोएडा की आठ कंपनियों का शुक्रवार को उत्पादन बंद हो गया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की टीम ने शुक्रवार को मुआयना कर इसकी पुष्टि की। वहीं, 19 कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनसे दो सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मार्च-अप्रैल में 54 कंपनियों की जांच की थी, जिसमें से 22 कंपनियों के इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) दुरुस्त मिले। बाकी 32 कंपनियों में से आठ का उत्पादन बंद कर दिया गया है। शेष 24 कंपनियों में से 19 को कारण बताओ नोटिस और पांच कंपनियों को सामान्य नोटिस भेजे गए हैं।
22 कंपनियों के ईटीपी की जांच में पानी में मर्करी व लेड की मात्रा पाई गई थी। सीपीसीबी की टीम ने इसकी जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, जिससे इन कंपनियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया गया। अब ये कंपनियां ईटीपी दुरुस्त कर रिपोर्ट जमा करेंगी। उसे सीपीसीबी को भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट एनजीटी के पास जाएगी। ट्रिब्युनल जैसा आदेश करेगा, उसका पालन कराया जाएगा।
एनजीटी के फैसले से पहले ही की कार्रवाई
आठ उद्योगों का उत्पादन बंद करने की कार्रवाई एनजीटी का फैसला आने से पहले ही कर दी गई। दोआबा पर्यावरण समिति की तरफ से एनजीटी में दायर याचिका पर इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को होनी थी। फैसले के पूरे आसार थे। इसे ध्यान में रखते हुए यूपीपीसीबी ने सीधे बंदी का आदेश जारी कर दिया, जबकि सीपीसीबी ने 12 जुलाई को इन कंपनियों को नोटिस जारी करने और ईटीपी में सुधार न करने पर बंदी के निर्देश दे दिए थे, लेकिन क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ से कार्रवाई करने में देरी हुई।