फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोएडा जैसा नहीं होगा यीडा की फिल्म सिटी का हाल, प्लॉट लेने वालों को पांच साल में शुरू करना होगा उद्योग

Sat, 26 Sep 2020 02:00 PM IST
प्राची प्रियम माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
विज्ञापन
फिलम सिटी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश सरकार ने यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ में फिल्म सिटी बनाने का एलान किया है। इसका हाल नोएडा की फिल्म सिटी जैसा नहीं हो, इसका खासा ख्याल रखा जा रहा है। यीडा की फिल्म सिटी में प्लॉट लेने वालों पर दो शर्तें लागू होंगी। 
विज्ञापन


पहली यह कि पजेशन मिलने के पांच वर्ष के अंदर प्लॉट पर उद्योग चालू करना होगा। और दूसरी यह कि आवंटी 10 साल तक प्लॉट बेच नहीं सकेंगे। प्लॉट आवंटन के पांच वर्ष के भीतर उद्योग चालू नहीं होने पर यीडा सीईओ अगर चाहें तो आवंटी को एक और वर्ष का वक्त दे सकते हैं, हालांकि इसके लिए आवंटी के पास दी गई अवधि में इंडस्ट्री शुरू नहीं होने की ठोस वजह होनी चाहिए। 

अहम है कि यीडा ने हाल ही में ये दो नियम सभी तरह के प्लॉट आवंटन पर लागू किए हैं। यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के मुताबिक दोनों शर्त्तें इसलिए लागू की गई हैं जिससे यहां केवल वही लोग प्लॉट खरीदें जिनको उद्योग चलाना हो। इससे क्षेत्र में निवेश होगा और रोजगार के अवसर पैदा हो सकेंगे। 
विज्ञापन


मालूम हो कि नोएडा की फिल्म सिटी में भूखंडों का आवंटन वर्ष 1988 में शुरू हुआ था। उस समय जिसने प्लॉट मांगा उसी को मिल गया था। नोएडा प्राधिकरण के उस समय के अफसरों ने यहां फिल्म उद्योग लगाने के लिए फिल्मकारों से खुद संपर्क किया था। 

कई नामचीन फिल्मकार जैसे पद्मिनी कोल्हापुरी, डैनी डेन्जोंग्पा, सुरेंद्र कपूर (अनिल कपूर के पिता), संदीप मारवाह (अनिल कपूर के जीजा) और गुलशन कुमार ने जमीन खरीदी, लेकिन वर्ष 2000 आते-आते इनमें से कई ने बढ़े दामों पर प्लॉट बेच दिए। अब इस फिल्म सिटी में मीडिया हाउस, फिल्मों से जुड़े इंस्टीट्यूट और कुछ कंपनियों के दफ्तर चल रहे हैं। 

फिल्म सिटी की जमीन के लिए भी होगी लैंड पूलिंग 
यीडा के सेक्टर 21 में 1000 एकड़ में फिल्म सिटी प्रस्तावित की गई है। इसमें से 615 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। 230 एकड़ जमीन पर किसानों की सहमति है। 

इस हिसाब से सिर्फ 155 एकड़ जमीन अभी किसानों से ली जानी है। इन किसानों के लिए लैंड पूलिंग की व्यवस्था प्राधिकरण की तरफ से दी जाएगी। किसान तीनों (अधिग्रहण, सहमति या लैंडपूलिंग) में से जिस विकल्प को अपनाएंगे, उसी पर अमल करते हुए उनकी जमीन ली जाएगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें